आईपीएल के खत्म होने में अब महज 10 दिन ही बचे हैं. इसके बाद ही भारतीय टीम कई सारी सीरीज का हिस्सा बनेगी. इसी के साथ ही साल के अंत में भारत को एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने थे, जिसे खेलने से इन्कार कर दिया गया है. इस समय यह मुद्दा काफी चर्चा का विषय बन गया है. सभी उच्च खिलाड़ी इस पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं.
भारत को खेलने चाहिए डे-नाईट टेस्ट मैच

इस बात पर भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने चाहिए और गुलाबी गेंद से होने वाले मैचों को लेकर अपनी आशंकाओं को खत्म कर देना चाहिए.
भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस साल के आखिर में एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने से इंकार कर दिया, जिसके कारण कई पूर्व क्रिकेटरों ने उसकी आलोचना की. इनमें मार्क वॉ और इयान चैपल भी शामिल हैं.
मैं हूँ डे-नाईट टेस्ट मैच के पक्ष में

हरभजन ने पीटीआई से कहा, “मुझे नहीं पता कि वे डे-नाइट टेस्ट मैच क्यों नहीं खेलना चाहते हैं. यह दिलचस्प प्रारूप है और हमें इसे अपनाना चाहिए. मैं पूरी तरह से इसके पक्ष में हूं. मुझे बताइए कि गुलाबी गेंद से खेलने को लेकर क्या आशंकाएं हैं. अगर आप खेलते हो तो आप सामंजस्य बिठा सकते हो. हो सकता है कि यह उतना मुश्किल न हो जितना माना जा रहा है.”
टीम को देना चाहते हैं सर्वश्रेष्ठ संभावित मौका

कमिटी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटर ने अगले 18 महीने तक डे-नाइट टेस्ट मैच नहीं खेलने की भारतीय टीम की मांग स्वीकार की. कमिटी के प्रमुख विनोद राय ने एक समारोह में कहा जिसमें हरभजन सिंह भी मौजूद थे, “मेरा मानना है कि प्रत्येक टीम सीरीज जीतना चाहती है और यही वजह है कि हम अपनी टीम को सर्वश्रेष्ठ संभावित मौका देना चाहते हैं.”
एक चुनौती स्वीकार करने में कोई नुकसान नहीं

विनोद राय के बयान के बाद जब हरभजन से पूछा गया कि भारतीय बल्लेबाजों को दूधिया रोशनी में जोश हेजलवुड और मिशेल स्टार्क का सामना करने में दिक्कत हो सकती है? इस पर हरभजन सिंह ने कहा,
“अगर आप आउट हो जाते हो तो क्या होगा? हमारे पास भी तेज गेंदबाज हैं जो उन्हें परेशानी में डाल सकते हैं और हमें क्या लगता है कि हमारे बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों का सामना नहीं कर सकते हैं. यह एक चुनौती है और चुनौती स्वीकार करने में क्या नुकसान होने वाला है. जब हम टेस्ट क्रिकेट में नए थे, तो केवल एसजी गेंद से गेंदबाजी करना जानते थे, लेकिन धीरे-धीरे कूकाबुरा और ड्यूक से गेंदबाजी करना सीखे.”
जिंदगी सीखने की प्रक्रिया है

हरभजन ने कहा,
“क्या आप इंग्लैंड के खिलाफ उसकी सरजमीं पर बादल छाए होने पर खेलने की चुनौती स्वीकार नहीं करते. क्या यह चुनौती नहीं है? अगर हम यह चुनौती स्वीकार कर सकते हैं तो फिर गुलाबी गेंद से खेलने की चुनौती क्यों नहीं स्वीकार करते. जिंदगी सीखने की प्रक्रिया है और अगर हम नए प्रारूप को अपनाते हैं, तो उसमें कोई नुकसान नहीं है.”
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