भारतीय नागरिक मनेश जैन और इमरान मुस्कान शिमजी का नाम साउथ अफ्रीकन कोर्ट में चल रहे पूर्व क्रिकेटर गौतम बोधी सम्बंधित भ्रष्टाचार मामले में सामने आया है. राज्य ने बोडी की जमानत ( 3000 रु) का विरोध नहीं किया, लेकिन अभियोजक विलेम वैन ज़िल ने पूर्व पेशेवर क्रिकेटर के लिए कुछ पूर्व शर्त निर्धारित की. उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया और उन्हें किसी भी अन्य खिलाड़ी से संपर्क करने से रोका गया है.
जनवरी 2016 में, बोडी को क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) ने भर्ती एजेंट के रूप में अपनी भूमिका के लिए 20 साल तक निलंबित कर दिया था, जो पिछले दिसंबर में RAM SLAM T20 में खेलने वाले दक्षिण अफ़्रीकी घरेलू क्रिकेटरों के साथ भारतीय सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़ा था.

ऐसा प्रतीत होता है कि जैन और शिमजी ने बोडी तक पहुंचकर मध्यस्थों की भूमिका निभाई. और अवैध सट्टेबाजी से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया. बता दें, अगस्त 2015 में बोधी ने भारत का दौरा किया यानी दक्षिण अफ्रीका में सीजन शुरू होने से एक आध महीने पहले. जिसमें उन्होंने जैन, शिमजी और सिंडिकेट सदस्यों से मुलाक़ात की.

भारत में रहते हुए उन्हें बताया गया कि स्पॉट फिक्सिंग में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को प्रति मैच R600000 – R700000 (~ 44000 – 52000 USD) के बीच कमाई की उम्मीद है. उन्हें लक्जरी घड़ियों का भी वादा किया गया था.बोडी गौतम बोधी को प्रति मैच R150000 (~ 11000 अमरीकी डालर) की पेशकश की गई थी.
जब वह भारत से लौटे तो उन्होंने खिलाड़ियों को भर्ती करना शुरू कर लिया. खुद बोधी ने साल 2014/15 में लायंस के लिए अपना अंतिम फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला था और अभी भी लायंस ड्रेसिंग रूम में मौजूद रहते थे.

यह बाद में उभरा कि स्पॉट फिक्सिंग घोटाले में फंसे छह अन्य खिलाड़ियों में से पांच इसी टीम के हैं. वहीं एक आरोपी टाइटन्स के लिये लंबे समय से खेल रहा था .
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