भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों इंग्लैंड के खिलाफ खेलने में व्यस्त है और साथ ही पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी टीम इंडिया के साथ गए है और कमेंट्री का मजा ले रहे है। इस दौरान लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में एक बड़े रूम में दादा कहे जाने वाले गांगुली की पुस्तक का अनावरण किया गया और उसके बाद टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा की गयी।

इस महत्वपूर्ण चर्चा में चार पूर्व टेस्ट कप्तान थे, और साथ में सर जेफरी आर्चर भी मौजूद थे। गांगुली, कुमार संगकारा, माइक गट्टिंग और माइक एथर्टन सभी एक बिंदु पर सहमत हुए कि टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को ट्वेंटी-20 क्रिकेट से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
इनमें से शायद ही कोई सौरव गांगुली से ज्यादा पिच और ग्राउंड की स्थिति को बेहतर ढंग से समझता हो। जी हाँ, क्योंकि आज गांगुली क्रिकेट प्रशासक के रूप में भूमिका निभा रहे है, क्योंकि इन्हें बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। इस कारण इन्हें ग्राउंड और पिच के बारे में बाकी पूर्व कप्तानों की भांति ज्यादा जानकारी है।

“हमने पिछले साल नौ आईपीएल खेलों की मेजबानी की थी और हर मैच पूरा हुआ। लोगों में थकान देखने को नहीं मिली, हर मैच के बाद दूसरा मैच अच्छा रहा और बदलता गया।”
गांगुली ने कहा, “क्रिकेट में काफी परिवर्तन हुए है और लोगों ने खेल के सबसे छोटे प्रारूप को ज्यादा पसंद करना शुरू कर दिया है।”
महान भारतीय कप्तान ने कहा, डे-नाइट टेस्ट मैच टेस्ट क्रिकेट को जीवित रखने का सबसे अच्छा तरीका है। इसमें चुनौती पांच दिनों तक खड़ी रहती है, इसलिए मुझे विश्वास है कि डे-नाइट टेस्ट आगे बढ़ रहा है। हर कोई काम करता है, आप हर समय कार्यालय से बाहर नहीं निकल सकते। टेस्ट क्रिकेट की पुनरीक्षा की जरूरत है। हमें समझना होगा कि समय बदल गया है और हमें समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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