इंडिया की अंडर 19 क्रिकेट टीम ने अभी कुछ दिन पहले ही एशिया कप जीता हैं. इस टूनामेंट में भारत की अंडर 19 क्रिकेट टीम ने श्री लंका को मैच में पछाड़ कर इस खिताब पर अपना कब्ज़ा किया.
इंडिया की इस जीत में सबसे बड़ा योगदान अगर किसी का हैं तो वो हैं महज 17 साल के ओपनर बल्लेबाज का, एक ऐसा बल्लेबाज जिसने क्रिकेट खेलने के लिए गोलगप्पे बेचे और टैंट में गुज़ारा किया पर कहते हैं न मन में अगर किसी काम को करने की सच्ची लगन होतो तो वो काम पूरा जरूर होता हैं.

हम बात कर रहे हैं यशस्वी जायसवाल की जिन्होंने इस टूनामेंट में न सिर्फ रनों की झड़ी लगा दी तो वही वो इस मैच के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी बने ये वही खिलाड़ी हैं.
दिन में अभ्यास कर रात को बेचे गोलगप्पे
यशस्वी का जन्म उत्तर प्रदेश के भदोही में हुआ था. उनका परिवार बेहद ही साधारण था, उन्होने बचपन से ही बड़ा क्रिकेटर बनने का सपना देखा था और इस सपने का पीछा करते हुए वो मुंबई चले आये उस समय इनकी उम्र महज 11 साल थी.

मगर यहाँ यशस्वी को न तो खाने के लिए खाना मिला पा रहा था और न ही रहने के लिए उचित जगह. क्रिकइन्फो से बातचीत के दौरान अपने पुराने वक़्त की बात करते हुए यशस्वी कहते हैं कि,
“मैं मुंबई बस ये सोच कर आ गया था कि मुझे बस क्रिकेट खेलना हैं. मैं टैंट में रहता था ,जहां न तो पानी था न बिजली थी और न ही टॉयलेट मुझे सबसे ज्यादा समस्या तब आयी जब मेरे पास पैसे बिलकुल खत्म हो गए.”
उन्होंने आगे बात करते हुए ये भी बताया कि,
“मैंने पैसों के लिए गोलगप्पे बेचना शुरू किया. दिन में मैंने प्रैक्टिस की और रात को गोलगप्पे का ठेला लगाया जब मेरे साथ के साथी कभी-कभी मेरे पास गोलगप्पे खाने आ जाते थे जब मुझे बहुत गन्दा लगता था, लेकिन क्या करता ये जरुरी भी था.”
तीन साल में लगाए 51 शतक

इस खिलाड़ी के कोच ज्वाला सिंह बचपन से ही यशस्वी के इस हुनर के कायल थे. क्रिकइन्फो से बातचीत के दौरान उनके कोच ज्वाला सिंह ने कहा कि
“जब मैंने इसको पहली बार खेलते हुए देखा था तब ये महज 11 से 12 साल का रहा होगा. मैं अपने आपको इससे प्रभावित किये बिना रह नहीं पाया जब मेरे मित्र ने मुझे बताया कि एक लड़का हैं, जिसे क्रिकेट का बहुत शौक हैं. उसका परिवार उसके साथ नहीं हैं वह इस वक़्त बहुत मुश्किल में हैं. कुछ समय बाद खुद ज्वाला सिंह ने उसे ट्रेनिंग देने का फैसला लिया.”
यशस्वी के कोच ये दावा करते हैं कि उनके शिष्य यशस्वी ने पिछले तीन साल में 51 शतक लगाए हैं.
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