तीनों फॉर्मेट में विराट कोहली के कप्तान बनने के बाद बीसीसीआई में कुछ बदलाव देखने को मिले हैं. धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी. इसके बाद विराट को टीम टेस्ट टीम की कप्तानी सौंप दी गयी. पिछले वर्ष धोनी ने टी-20 और वनडे की कप्तानी भी छोड़ने का निर्णय लिया और तब से तीनों फॉर्मेट की कप्तान विराट कोहली के हाथों में है.
डीआरएस

महेंद्र सिंह धोनी डीआरएस को सही नहीं मानते हैं. वह हमेशा से इसकी आलोचना करते आए. 2013 में बीसीसीआई ने डीआरएस के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी थी. इसके बाद जब विराट कोहली ने जब टीम की कमान संभाली तो उन्होंने इस पर सकरात्मक रवैया अपनाया और बाद में
बीसीसीआई ने भी इसे मंजूरी दे दी.
हर खिलाड़ी को बराबर मौका
विराट कोहली ने जब से टीम इंडिया की कमान संभाली वह एक मजबूत टीम की ओर देख रहे हैं. कुछ मैचों में ही फेल होने पर मुरली विजय को टीम से बाहर कर दिया गया.

सीमित ओवरों में विराट के कप्तान बनाने के बाद ही रविंद्र जडेजा और आर अश्विन टीम से ड्राप कर दिए गए थे. उनकी की जगह युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव को मौका दिया गया. जिसके बाद से इन दोनों गेंदबाजों ने जबरदस्त प्रदर्शन करने हुए अश्विन और जडेजा को मौका नहीं दिया. जडेजा ने हाल ही में सीमित ओवरों में लगभग एक साल बाद वनडे टीम में वापसी की.
यो यो टेस्ट अनिवार्य

विराट फिटनेस पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं. वह खुद भी दुनिया के सबसे फिट खिलाडियों में से एक हैं. कोहली के कमान संभालने के बाद ही यो यो टेस्ट को अनिवार्य कर दिया गया. हालाँकि इसकी कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने आलोचना भी की है. अभी तक इसे कई खिलाड़ी पास करने में असफल भी रहे हैं. इंग्लैंड दौरे के दौरान अंबाती रायडू टेस्ट पास नहीं कर पाए थे. जिसके चलते उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा था.
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