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रेड बुल एथलीट तुहीन ने सहायद्री चुनौती को पार किया

नयी दिल्ली
पुणे के पर्वतारोही तुहीन सतारकर ने 8 दिनों में दुर्गम सहायद्री पर्वत श्रृंखला में तीन रास्तों से चढ़ाई की और वे इन मार्गों पर लगातार चढ़ाई करने वाले पहले व्यक्तिगत भारतीय बन गये हैं। रेड बुल एथलीट तुहीन सतारकर भारत की मौजूदा पीढ़ी के एक बेहतरीन पर्वतारोही हैं। तुहीन के माता-पिता दोनों ही पर्वतारोही हैं और पर्वतारोहण की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता से ही मिली है। तुहीन  महज आठ साल की उम्र से ही पर्वतारोहण कर रहे हैं। 8 दिनों की क्लाइबिंग ट्रिप के दौरान उन्हें सहायद्री पहाड़ों में तीन उच्च चोटियों पर चढ़ाई करनी थी। यह धीरज, रफ्तार और अंवेषण की असली परीक्षा थी। उन्होंने पहाड़ी रास्तों का अध्ययन किया, मार्ग निर्धारित किये, सफलतापूर्वक चढ़ाई की और अगले गंतव्य का रूख किया। उन्होंने 8 दिनों में प्रोजेक्ट को पूरा किया।

अपनी परियोजना के दौरान वह धोदाप, जीवधान और नानेघाट पहुंचे, जोकि तीन मशहूर चोटियां हैं और जिन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके मराठी मालवाओं द्वारा चढ़ाई करने के लिये जाना जाता है। दंतकथाओं के अनुसार, मराठा राजा और उनके सैनिक मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों पर अप्रत्याशित हमलों को करने के लिये आदिम उपकरण का इस्तेमाल कर इन रास्तों की चढ़ाई किया करते थे। इस प्रोजेक्ट के साथ, तुहीन इन रास्तों पर लगातार चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय बन गये हैं और उन्होंने यह साबित कर दिया है कि भारत के क्लाइबिंग सर्किट में एक नई चुनौती की तलाश करने वालों के लिये वे प्रेरणास्रोत रहेंगे। रेड बुल एथलीट तुहीन ने कहा कि यह मेरे लिये एक रोमांचक परीक्षा रही है। तीन किलों में तीन चढ़ाई, और यह सब 8 दिनों में करना निश्चित रूप से एक चुनौती है। यह वाकई ऐसा अनुभव था जिसने मुझे मेरी सीमाओं से आगे बढ़ाया और इसका मैंने भरपूर आनंद उठाया।