सचिन रमेश तेंदुलकर का नाम भारत का बच्चा-बच्चा जानता है। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर के नाम क्रिकेट जगत में कई बड़े विश्व रिकॉर्ड हैं। देखा जाए तो सचिन तेंदुलकर की बदौलत ही इंडियन क्रिकेट टीम में एक नए युग की शुरूआत हुई।देश को कई नायाब जीतें दिलवाने वाले सचिन भले ही क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन आज की तारीख में भी वह देश के भावी क्रिकेटरों के लिए आदर्श बने हुए हैं।
एमएस धोनी, वीरेंद्र सहवाग और विराट कोहली जैसे दिग्गज क्रिकेटर्स यह बात बहुत पहले ही कह चुके हैं कि क्रिकेट के भगवान की बैटिंग देखकर ही उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया।जब साल 2014 में कप्तान विराट कोहली इंग्लैंड दौरे में बल्लेबाजी में बुरी तरह से नाकाम रहे, तब वह अपनी तकनीक में सुधार के लिए सचिन के पास ही पहुंचे थे। सचिन की देखरेख में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी तकनीक में सुधार किए। सचिन की सलाह पर अमल करने के बाद ही कोहली अपने बल्ले से रन बटोरने लगे।
अब सोच रहे होंगे कि सचिन तेंदुलकर एक क्रिकेटर से क्रिकेट के भगवान कैसे बन गए। बचपन में बेहद शरारती सचिन को उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर बल्लेबाजी के गुर सीखने के लिए रमाकांत आचरेकर के पास ले गए।सचिन के गुरू रमाकांत आचरेकर के मुताबिक, सचिन अपने शुरूआती दिनों में अनुशासित नहीं थे, लेकिन कोच की एक डांट ने सचिन की दुनिया बदलकर रख दी।
साल 2017 में सचिन ने ट्वीट के जरिए बताया था कि स्कूली दिनों वह जूनियर टीम के तरफ से खेल रहे थे। स्कूल की सीनियर टीम वानखेडे स्टेडियम (मुंबई) में हैरिस शील्ड का फाइनल खेल रही थी। उसी दिन आचरेकर सर ने मेरे लिए एक प्रैक्टिस मैच का आयोजन किया था।
स्कूल के बाद प्रेक्टिस मैच के दौरान रमाकांत आचरेकर ने सचिन को चौथे नंबर बैटिंग करने के लिए कहा था, उन्होंने कहा कि मैंने तुम्हारे लिए उस टीम के कप्तान से बात कर ली है। लेकिन सचिन वह मैच खेलने नहीं गए।
सचिन कहते हैं कि मैं वानखेडे स्टेडियम में सीनियर टीम के मैच में खिलाड़ियों को चीयर कर रहा था। खेल के बाद मैंने आचरेकर सर को नमस्ते किया। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुमने आज कितने रन बनाए। जवाब में कहा कि सर मैं सीनियर टीम को चीयर करने के लिए यहां आया हूं। इसके बाद आचरेकर सर ने मुझे सबके सामने जो डांट लगाई, उनके एक-एक शब्द आज भी मुझे याद हैं। उस दिन से लेकर संन्यास लेने तक सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की दुनिया में इतिहास रचते रहे।
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