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श्रीलंका के महान बल्लेबाज कुमार संगकारा ने भारत के वीरेन्द्र सहवाग को बताया दुनिया का सबसे निःस्वार्थ बल्लेबाज

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग का विश्व क्रिकेट में बहुत ही खास प्रभाव रहा है। भारतीय टीम क्रिकेट में वीरेन्द्र सहवाग का ऐसा प्रभुत्व रहा है कि इन्हें कोई भी अपनी ड्रीम इलेवन टीम से बाहर नहीं रख सकता। इसका सबसे बड़ा कारण है कि उन्होंने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी से भारत को कई मैच जीताए हैं।

कुमार संगकारा ने अपने कॉलम में वीरेन्द्र सहवाग को लेकर की जमकर तारीफ

वीरेन्द्र सहवाग की सबसे खास बात रही है कि उन्होंने अपनी आक्रमक बल्लेबाजी से भारतीय टीम को टेस्ट क्रिकेट में बड़े लक्ष्य का पीछा करने का भी माद्दा दिखाया।

वीरेन्द्र सहवाग के निः स्वार्थ बल्लेबाजी करने के तरीके की पूरी दुनिया कायल है जिसमें अब श्रीलंका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज कुमार संगकारा ने जमकर प्रशंसा करते हुए एक बड़ी बात कही है।

कुमार संगकारा ने अपने कॉलम में लिखा कि

“जब से मैंने पहली बार उन्हें(वीरेन्द्र सहवाग) को खेलते देखा है, मैं वीरेन्द्र सहवाग का बड़ा प्रशंसक रहा हूं। सिर्फ उनकी अभूतपूर्व क्षमता ही नहीं बल्कि उनकी मानसिकता जिसमें वो बहुत तेजी के साथ रन बनाने का काम करते हैं।”

“ज्यादातर बल्लेबाजों में ये एक बहुत ही रेयर विशेषता होती है। हालांकि उनमें से ज्यादातर सहवाग के साथ सुविचारित और संरचित तरीके से रनों का संचय करने के लिए संतुष्ट हैं, ये उनकी एक पारी की पहली गेंद से प्रभुत्व की उस स्थिति को प्राप्त करने को संभव बनाते हैं जितना कम समय हो। सहवाग कभी भी अपने औसत और रिकॉर्ड के बारे में सोचने वाले खिलाड़ी नहीं थे। उनकी केवल एक ही महत्वाकांक्षा होती थी कि वो अपनी तरफ से रन बनाए वो जल्दी से स्कोर करते और परिणाम को जीत के रूप में खत्म करते।”

“उनकी तकनीक बहुत ही सरल थी, जो एक महान हैंड-आई कॉर्डिनेशन, लॉ फुटवर्क और जबरदस्त संतुलन के साथ ही कलाई की शानदार तकनीक से आधारित थी। वो गेंदबाजों को स्टंप पर गेंदबाजी करवाने के लिए हमेशा ऑफ साइड में खुलने की कोशिश करते थे, क्योंकि उनका कहना था कि गेंद को हिट करने के लिए हाथ में बल्ला था और मैदान में एक सीमारेखा भी थी।”

 “दो पारियां हैं जो विशेष रूप से बहुत शानदार रही। 2008 में गाले में पहली उनकी शानदार पारी थी जिसे मैंने कभी नहीं देखा था। ये उस श्रेणी में आता है जब ब्रायन लारा ने एक सीरीज में हमारे खिलाफ 688 रन बनाए थे। भारत सीरीज में 0-1 से नीचे था। अजंता मेंडिस अपने डेब्यू पर एसएससी में चल रहे थे। हर भारतीय बल्लेबाज को मुरली और मेंडिस ने परेशान किया था। लेकिन वीरेन्द्र सहवाग ने अपनी सभी गन को फूंक दिया। वो टीम के 329 रनों के टोटल में 231 गेंदों में 201 रनों पर कैरिंग द बैट के साठ लौटे।”

“फिर उन्होंवे 2009 में मुंबई में शानदार पारी के साथ मैच को हमारे सामने रखा, जहां से उन्होंने फिर से हमारे अधिकांश गेंदबाजों पर अपना काम कर लिया था। और जिस गति से उन्होंने रन बनाए उन्होंने 293 रनों के लिए केवल 254 गेंदों का सामना किया। इसका मतलब था कि भारत ने खेल में 700 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी समय पर मैच जीता।”

“वीरेन्द्र सहवाग वहां खड़े थे। वो स्टेप आउट करने पर भी मेंडिस या मुरली की पढ़ने की चिंता नहीं करते थे। वो आक्रमक बल्लेबाजी के मास्टरक्लास थे। इस क्षेत्र में ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं था ऐसा कोई एरिया नहीं जहां वो शॉट्स नहीं खेल सकते थे। अगर कभी कोई दिक्कत होती जब वो गेंद को नहीं पढ़ पाते तो वो अपने हथियारों के विस्तार करते और गेंद को बाउन्ड्री के बाहर फेंक ही देते।”

“मेरे लिए वीरेन्द्र सहवाग महान हैं क्योंकि वो एक ही चीज को ध्यान में रखकर बल्लेबाजी करते थे कि किसी भी हालात में भारत को जीत की स्थिति में लाना है।”

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