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मेरी जिंदगी में बायॉपिक के लिए कुछ रोचक नहीं: सुनील गावसकर

मुंबई
भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावसकर का कहना है कि उनकी जिंदगी में ऐसा कुछ रोचक नहीं, जिसके आधार पर उनके जीवन पर आधारित बायॉपिक बनाई जा सके। क्रिकेट की दुनिया से महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंडुलकर और कपिल देव पर बायॉपिक बन चुकी है और क्रिकेटरों पर लगातार बायॉपिक बनाने का चलन बॉलिवुड में बढ़ता जा रहा है। गावसकर ने कहा, ‘मैं सच में अपने ऊपर बायॉपिक के पक्ष में नहीं हूं। मेरा जीवन काफी नियमित है। इसमें कुछ रोचक नहीं। एक दर्शक के तौर पर मैं इसे पर्दे पर देखना भी पसंद नहीं करूंगा। तो फिर लोग क्यों पसंद करेंगे? कई बार लोगों ने मुझसे बायॉपिक के सम्बंध में बात की लेकिन मैं मानता हूं कि मेरा जीवन बायॉपिक के लिए रोचक नहीं है।’ निर्देशक कबी खान इन दिनों 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम की उपलब्धि पर बायॉपिक बना रहे हैं। विश्व कप जीतने वाली टीम में गावसकर भी शामिल रहे हैं। 

यह पूछे जाने पर कि क्या वह कबीर खान से मिले हैं, गावसकर ने कहा, ‘हां मैं कबीर से मिला हूं और हमारी बातचीत 1983 में विश्व कप जीतने वाली टीम पर केंद्रित रही। हमने विश्व कप टूर्नमेंट के बारे में बात की और साथ ही विश्व कप में हमारी टीम के सफर पर बात की।’ टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहले 10 हजार रन पूरे करने वाले गावसकर ने कहा, ‘लेकिन हमारी मुलाकात आगे भी होगी और हमारी बातचीत का विषय टीम और उसकी सफलता ही होगी।’ फिल्मकार करण जौहर के टेलीविजन कार्यक्रम काफी विद करन में क्रिकेटर स्टार हार्दिक पंड्या और लोकेश राहुल के शामिल होने और उस कार्यक्रम में पंड्या और राहुल द्वारा दिए गए विवादित बयान को लेकर गावसकर ने कहा कि करियर की शुरुआत में कुछ खिलाड़ियों के लिए स्टारडम सम्भालना मुश्किल होता है। 

गावसकर ने कहा, ‘मुझे यहां बताना होगा कि किसी भी खिलाड़ी के करियर के शुरुआती दौर में स्टारडम को सम्भालना काफी मुश्किल होता है। आपको अपने खेल में लगातार सुधार करना होता है और एक खिलाड़ी के तौर पर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है। ऐसे में सीनियर खिलाड़ियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करें। पुराने खिलाड़ियों को पता होता है कि ऐसे हालात से कैसे निपटना है क्योंकि वे पहले इस तरह के हालात से गुजर चुके होते हैं।’ टी-20 के समय में टेस्ट क्रिकेट की प्रासंगिकता के बारे में गावसकर ने कहा, ‘हर युवा को पता होना चाहिए कि क्रिकेटर को इतिहास में टेस्ट क्रिकेट के उसके प्रदर्शन के आधार पर याद किया जाएगा। यह प्रारूप उत्कृष्ट है, लेकिन नई पीढ़ी टी-20 एवं वनडे क्रिकेट बहुत खेल रही है और अधिक रन भी बना रही है। इस कारण से टेस्ट क्रिकेट में भी अधिक नतीजे निकल रहे हैं, पहले ज्यादा मैच ड्रॉ होते थे।’ गावसकर ने कहा, ‘इसने टेस्ट क्रिकेट अधिक रोमांचक भी बनाया है।’