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India vs Australia: कोटला में दिख सकता है ओस का खेल

 नई दिल्ली 
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सीरीज में ओस एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। मेजबान टीम दो मौकों पर-रांची और मोहाली में- परिस्थितियों का सही आकलन नहीं कर पाई। ऑस्ट्रेलिया ने मौके का फायदा उठाया और 0-2 से पीछे चल रही कंगारू टीम अब सीरीज में 2-2 से बराबरी पर खड़ी है। पिछले दोनों ही मैचों में ओस भारतीय टीम के लिए बड़ा बड़ा फैक्टर बनी और अब सीरीज के निर्णायक मैच में ओस को ध्यान में रखते हुए टॉस भी महत्वपूर्ण बन गया है। 

सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला बुधवार को राजधानी दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेला जाएगा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यहां भी ओस का असर देखने को मिलेगा। दिल्ली की सर्दी अब विदा ले रही है और दिन का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। हालांकि सुबह और शाम की सर्दी अभी बाकी है और मैच के आखिर में ओस पड़ने की उम्मीद की जा सकती है। ऐसे में दोनों टीमें यहां सिर्फ टीम कॉम्बिनेशन पर ही नहीं बल्कि ओस के फैक्टर को भी ध्यान में रखकर अपनी योजनाएं बनाने में जुटी होंगी। 

दोनों टीमों की कोशिश है कि उन्हें मैच से पहले परिस्थितियों का सही आकलन हो। भारतीय बोलिंग कोच भारत अरुण, बल्लेबाजी कोच संजय बांगड़ और मैनेजर सुनील सुब्रह्मणियम मैच की पूर्व संध्या पर मैदान पर पहुंचे और ग्राउंड स्टाफ से बात की। सूत्रों की मानें तो उन्होंने फिरोजशाह कोटला के क्यूरेटर अंकित दत्ता से मैच की सुबह टीम को यह बताने के लिए कहा है कि मंगलवार रात को कितनी ओस पड़ी। 

ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन भी पिच और ओस के बारे में दत्ता और बीसीसीआई के नॉर्थ जोन के क्यूरेटर सुनील चौहान से जानकारी लेती रही। पिच कमिटी के एक सदस्य ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'ऑस्ट्रेलियाई टीम के सपॉर्ट स्टाफ के दो सदस्य दोपहर के ट्रेनिंग सेशन के बाद हालात का जायजा लेने के लिए रुके रहे।' 

डीडीसीए की पिच और ग्राउंड कमिटी के मुताबिक, इस बात की पूरी उम्मीद की जा सकती है कि शाम सात बजे के आसपास ओस उतरनी शुरू हो जाएगी। मौसम विभाग ने भी बुधवार को धुंध रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करने को प्राथमिकता देगी। 

एक वरिष्ठ ग्राउंड स्टाफ ने बताया, 'हम ओस पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। सोमवार और मंगलवार को ओस थी और बुधवार भी कोई अपवाद होने की उम्मीद नहीं है। अगर हवा नहीं चली, तो ओस बैठ जाएगी और बाद में बोलिंग करने वाली टीम पर इसका असर नजर आएगा। ऐसे में गेंदबाजों के लिए बॉल पकड़ना आसान नहीं होगा। ऐसे में आपको ड्यू फैक्टर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।'