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क्रिकेट में गौतम गंभीर जितना घमंडी कोई दूसरा नहीं होगा: शाहिद अफरीदी

 
नई दिल्ली

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी और टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज गौतम गंभीर के बीच टकराव की खबरें हमेशा आती रहती हैं। जब दोनों खिलाड़ी मैदान पर एक-दूसरे के खिलाफ खेलते थे, तब भी एक-दूसरे से उलझते दिखते थे और अब भी दोनों को सोशल मीडिया पर एक-दूसरे लोहा लेते कई बार देखा गया है। इस बीच शाहिद अफरीदी की आत्मकथा 'गेम चेंजर' एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

साल 2019 में प्रकाशित हुई इस किताब में अफरीदी ने गौतम गंभीर को लेकर टिप्पणियां जो की हैं। दो दशकों तक पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलने वाले अफरीदी ने गंभीर को घमंडी करार दिया है।

इस ऑलराउडर खिलाड़ी ने अपनी ऑटोबायॉग्रफी में लिखा कि उन्हें गौतम गंभीर और महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न के खिलाफ खेलना बहुत पसंद था क्योंकि ये दोनों ही स्लेजिंग पर प्रतिक्रिया देते थे। अपनी किताब में अफरीदी ने गंभीर के बारे में लिखा, 'कुछ प्रतिद्वंद्विता पर्सनल थी, कुछ प्रफेशनल। लेकिन गंभीर का अनूठा केस था। बहुत खराब गौतम। वह और उनकी ऐटीट्यूड की समस्या।'

इसके बाद अफरीदी ने इस किताब में लिखा, 'गौतम गंभीर के साथ ऐटीट्यूड प्रॉब्लम थी। वह, जिनका कोई व्यक्तित्व नहीं, क्रिकेट जैसे महान खेल में उनके जैसा चरित्र (कैरेक्टर) शायद ही हो। वह, जिनके नाम कोई बड़ा रेकॉर्ड नहीं है, बस ढेर सारा ऐटीट्यूड है। वह, जो खुद को समझता है कि डॉन ब्रैडमैन और जेम्स बॉन्ड दोनो की काबिलियत रखने वाला है।'

गौतम गंभीर के रेकॉर्ड्स पर सवाल उठाने वाले अफरीदी एक बात शायद भूल गए कि भारत के पास दो विश्व कप खिताब में गौतम गंभीर की भूमिका अहम रही थी। गंभीर ने साल 2007 के खिताबी मुकाबले में पाकिस्तान के ही खिलाफ 75 रन बनाए थे, जिसमें भारत को जीत मिली थी। इसी तरह 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में उन्होंने 97 रन की पारी खेली थी। यहां भी टीम इंडिया ने यह खिताब अपने नाम किया था।

गंभीर के अलावा अफरीदी ने अपनी इस किताब टीम इंडिया के उन तमाम खिलाड़ियों पर अपनी राय रखी है, जिनके साथ वह क्रिकेट खेले हैं। अफरीदी ने इस किताब में युवराज सिंह, हरभजन सिंह और अजय जडेजा की तारीफ की है और उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताया है। इस ऑलराउंडर ने इन खिलाड़ियों के बारे में लिखा कि मैदान के बाहर हमने काफी वक्त एक-दूसरे के साथ बिताया है। लेकिन मैदान पर हम में कोई भी किसी को फूटी आंख नहीं सुहाता था।