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गांगुली के 5 ऐसे फैसले, जिन्होंने बदल दिया टीम इंडिया का चेहरा

स्पोर्ट्स डेस्क। वर्ल्ड क्रिकेट में भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का आज (8 जुलाई) 48वां जन्मदिन है. सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने दुनिया भर में अपनी धाक जमाई. टीम इंडिया ने विदेशों में अपना लोहा मनवाया. गांगुली ने वर्ल्ड क्रिकेट में अपनी दादागीरी दिखाई .चलिए एक नजर डालते हैं गांगुली के उन फैसलों पर, जिन्होंने बदला भारतीय क्रिकेट का चेहरा-

कोलकाता टेस्ट में लक्ष्मण को नंबर तीन पर भेजना

2001 कोलकाता टेस्ट हमेशा भारतीय क्रिकेट के सबसे अहम टेस्ट मैचों में गिना जाएगा। इस मैच में भारत ने फॉलोऑन झेलने के बाद ऑस्ट्रेलिया को हराया था। पहली पारी में वीवीएस लक्ष्मण इकलौते ऐसे बल्लेबाज थे, जो ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के खिलाफ सहज होकर खेल रहे थे।

सहवाग से पारी का आगाज कराना

वीरेंद्र सहवाग मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते थे। दक्षिण अफ्रीका में जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था, तब भी वो मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के तौर पर ही उतरे थे। सहवाग ने नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए सेंचुरी ठोकी थी।

द्रविड़ को विकेटकीपिंग के लिए मनाना

सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया को विकेटकीपर बल्लेबाज की कमी काफी खल रही थी। परमानेंट विकेटकीपर बल्लेबाज नहीं मिलने पर गांगुली ने राहुल द्रविड़ को इसके लिए मनाया था। द्रविड़ के विकेटकीपिंग करने से टीम में बैलेंस आया।

धोनी को टीम में चुनना

2004 में गांगुली ने ही चयनकर्ताओं से धोनी पर दांव लगाने की बात कही थी। टीम इंडिया में धोनी की एंट्री का बड़ा श्रेय गांगुली को ही जाता है।


युवा क्रिकेटरों को बैक करना

वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान और महेंद्र सिंह धोनी ऐसे युवा क्रिकेटर्स थे, जिन्हें गांगुली ने काफी बैक किया था। गांगुली ने इन क्रिकेटरों पर विश्वास दिखाया और इन क्रिकेटरों ने उन्हें नतीजे दिए।



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