स्पोर्ट्स डेस्क। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11 साल के इतिहास में पहली बार मिड सीजन ट्रांसफर विंडो नियम लागू किया जाएगा। इस साल टीम टूर्नामेंट के बीच में ही टीमें नए खिलाडियों को शामिल कर सकती है जो कि उस टीम के साथ टूर्नामेंट के अंत तक रहेंगे और जो खिलाडी प्रभावित करने में नाकाम रहे है उनको बाहर कर सकती है। चूँकि टूर्नामेंट अपना आधार सफर तय कर चुका है इसलिए अब यह नियम प्रभावी होगा।
बीसीसीआई ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 'यह टूर्नामेंट का एक रोचक ट्विस्ट हो सकता है क्योंकि कई बार युवा खिलाडियों को टीम में लिया तो जाता है लेकिन उन्हें खेलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता है। लेकिन यह नियम टीमों को नए खिलाडियों को अपनी टीम में शामिल करने का अवसर प्रदान करेगा।
क्या है आईपीएल मिड सीजन ट्रांसफर विंडो -
आईपीएल का मिड सीजन ट्रांसफर विंडो सभी आठ टीमों को टूर्नामेंट के बीच में खिलाड़ियों को खरीदने और छोड़ने का का अवसर प्रदान करता है। अगर किसी टीम को लगता है कि कोई खिलाड़ी टीम में रहने के लिए उपयुक्त नहीं है, तो वे उसे अन्य टीमों में ट्रांसफर करने का विकल्प चुन सकते हैं। इसी प्रकार, अगर एक टीम को लगता है कि किसी खिलाड़ी को खरीदना उनके लिए फायदेमंद होगा, तो उन्हें ऐसा करने का मौका मिलेगा।
आईपीएल मिड सीजन ट्रांसफर विंडो में सभी खिलाडियों को दूसरी टीम में जाने का मौका नहीं मिलेगा। मैच नंबर 28 के बाद जिन खिलाडियों ने दो मैचों से कम मैच खेले है वे इस नियम के तहत ट्रांसफर हो सकते हैं। टीम में अनकैप्पड़ खिलाड़ी भी इस नियम के तहत ट्रांसफर के योग्य होंगे। प्रक्रिया के दौरान, खिलाड़ी के साथ दोनों टीमों को भी इस ट्रांसफर के लिए सहमत होना पड़ेगा।
यह नियम कुल 12 दिनों तक लागू होगा। चूँकि यह नियम 29 अप्रैल को हैदराबाद और राजस्थान के बीच खेले गए मैच के बाद से लागू हो चुका है जो कि हैदराबाद ने 11 रन जीता था, अब यह ट्रांसफर विंडो दिल्ली डेयरडेविल्स और हैदराबाद सनराइज़र्स के बीच 10 मई को खेले जाने वाले मैच के बाद बंद हो जायेगी।