क्रिकेट का क्रेज़ बढ़ता ही जा रहा है. ख़ासतौर पर तब से जब से टी-20 टूर्नामेंट शुरू हुए हैं. क्रिकेट के चाहने वालों को भी यह लेग बहुत पसंद आती हैं. इसका अहम कारण है कि इसका निर्णय बहुत जल्दी हो जाता है. कुछ घंटों में ही टीम की हार और जीत का निर्णय हो जाता है.
इसी के साथ खिलाड़ियों की बात करें तो उन्हें भी टी-20 टूर्नामेंट खास पसंद आते हैं. खिलाड़ियों को इंडियन प्रीमियर लीग, बिग बैश लीग जैसे टूर्नामेंट खेलना ज्यादा अच्छा लगता है. इसमें दबाव भी कम होता है और इससे पैसा ज्यादा कमाया जा सकता है. दुनिया भर में अलग अलग टी-20 लीगों के शुरु होने के बाद से आईसीसी के लिए इन्हें नियमों के दायरे के अंदर लाना मुश्किल हो रहा है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश ने निकाला नियम

खिलाड़ी टी-20 लीग की ओर ही भाग रहे हैं. इसी के चलते पिछले दिनों पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों को साल में केवल दो ही टी-20 लीगों में हिस्सा लेने का आदेश दिया है, जिसमें से एक पाकिस्तान सुपर लीग होगी. कुछ इसी तरह बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी अपने खिलाड़ियों को केवल दो विदेशी लीगों में खेलने की इजाजत दी है, वहीं उनके लिए घरेलू प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में खेलना अनिवार्य है.
टी-20 लीगों में नियंत्रण लाना है जरूरी

आईसीसी प्रमुथ डेविड रिचर्डसन भी विश्वभर की इन टी-20 लीगों को रेगुलेट करने के लिए नियम बनाने के पक्ष में हैं. रिचर्डसन का मानना है कि, “टी-20 लीग भविष्य में क्रिकेट के ओलंपिक का हिस्सा बनने के लिए अहम है, लेकिन उन्हें नियंत्रण में लाना जरूरी है.”
टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कर रहा है प्रभावित

रिचर्डसन ने कोलकाता में आईसीसी बैठक के दौरान कहा, “खेल का सामना करने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है घरेलू टी-20 लीगों का तेजी से बढ़ना. नई लीगों का शेड्यूल अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को प्रभावित कर रहा है. आईसीसी की नई समिति ये सुनिश्चित करेगी कि टी-20 लीग इस तरह से आयोजित की जाए कि वो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को प्रभावित ना करें और हमारे पास अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हों.”
टी-20 लीग अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में होंगे फिट

रिचर्डसन ने आगे कहा,
“समिति टी-20 लीगों को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में फिट करेगी, साथ ही ये भी देखेगी कि एक से ज्यादा लीग खेलने वाले खिलाड़ियों पर रोक लगाई जानी चाहिए या नहीं. हम ना केवल खिलाड़ियों पर रोक लगाने की बारे में बात कर रहे हैं बल्कि ये भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी नई लीग में खिलाड़ियों को सही तरीके से संरक्षित किया जाय, कम से कम भ्रष्टाचार विरोधी मानदंड हों, एंटी-डोपिंग, खिलाड़ी अनुबंधों का भुगतान और सभी प्रकार की चीजें हों.”
रिचर्डसन इन लीगों में निवेश करने वाले प्राइवेट स्टेकहोल्डर्स को भी दायरे के अंदर लाकर ये निश्चित करना चाहते हैं कि वो केवल पैसा कमाकर भागें ना.
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