खेल डेस्क। चेन्नई सुपर किंग्स ने दो साल के प्रतिबंध के बाद इंडियन प्रीमियर लीग 2018 में एक बार फिर महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में प्रवेश किया। इस सीजन में भी महेन्द्र सिंह धोनी की चेन्नई टीम उसी रंग में नजर आई जिसके कारण अब तक उसे जाना जाता रहा है। टीम ने इस सीजन में न सिर्फ अच्छा प्रदर्शन किया बल्कि महेन्द्र सिंह धोनी की शानदार कप्तानी और टीम के उम्दा प्रदर्शन की बदौलत चेन्नई ने तीसरी बार आईपीएल का खिताब जीतकर सबकों बता दिया कि इस फॉर्मेट का सबसे बड़ा शेर कौन है। अब तक इंडियन प्रीमियर लीग के 11 सीजन हो चुके हैं इन में से चेन्नई ने सिर्फ 9 सीजन में ही खेल पाई है।
चेन्नई ने अब तक खेले अपने 9 सीजन में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो शायद और कोई टीम नहीं जल्द नहीं कर पाएगी। धोनी की चेन्नई ने 9 सीजन में से 7 बार फाइनल में अपनी जगह बनाकर एक रिकॉर्ड बनाया है। जिसे शायद कोई टीम जल्द हीं नहीं तोड़ सकती। वैसे रिकॉर्ड की बात की जाएं तो इस सीजन में भी चेन्नई सुपर किंग्स ने या फिर उन महेन्द्र सिंह धोनी ने कई रिकॉर्ड दर्ज किए है। लेकिन क्या आपको पता है कि आईपीएल सीजन 11 का फाइनल जीतने के लिए धोनी के लिए तीन ऐसे संयोग रहे जिन्होंने चेन्नई को एक बार फिर आईपीएल का विनर बनाया। तो चलिए आज हम बताते है ऐसे तीन संयोग जिन्होंने चेन्नई को बनाया तीसरी बार आईपीएल खिताब का विनर।
नंबर सात सब को पता है कि महेन्द्र सिंह धोनी मैदान में जो अपनी जर्सी पहनते है उस पर नंबर-7 लिखा हुआ है। ये पहला संयोग है कि महेन्द्र सिंह धोनी नंबर-7 की टी शर्ट पहनकर मैदान पर उतरते हैं।
वहीं इस सीजन में ऐसा 7 वीं बार ही हुआ है कि चेन्नई सुपर किंग्स इस बार भी फाइनल में पहुंचने वाली टीम बनी है। उनका ये नंबर और चेन्नई का 7वीं बार आईपीएल के फाइनल में पहुंचना उनके लिए ये बढिय़ा संयोग रहा जिसके कारण उन्होंने आईपीएल-2018 की ट्रॉफी अपने नाम की।
9 सीजन और 7वीं बार पहुंची फाइनल में हमेशा ये कहा जाता रहा है कि महेन्द्र सिंह धोनी किस्मत के धनी है। लेकिन ये बात कितनी सहीं है इसके बारे में तो शायद महेन्द्र सिंह धोनी या फिर भगवान ही बता सकते हैं। लेकिन जब धोनी को पूरा समर्पित होकर मेहनत करते देखा जाता है तो शायद ये बात कुछ अटपटी लगती है। इस सीजन में भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
धोनी ने इस सीजन में 150.66 की स्ट्राइग रेट से 455 रन बनाए है। इसे आप धोनी की किस्मत नहीं बल्कि उनकी मेहनत ही कहेंगे जिन्होंने इस सीजन अपने बल्ले का लगातार जलवा दिखाया है और यही कारण है कि टीम को 7वीं बार फाइनल में पहुंचाने का थोड़ा बहुत तो क्रेडिट महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली पारियों को भी जाता है। जिसके कारण महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी ने 7वीं बार फाइनल खेलते हुए टीम को तीसरी बार आईपीएल खिताब दिलवाया है।
हैदराबद के स्कोर ने भी दिया 7 का साथ:- इसे संयोग कहे या फिर अनहोनी, लेकिन धोनी ही ऐसे खिलाड़ी है जो अनहोनी को भी होनी कर सकते हैं। कुछ ऐसा हुआ था आईपीएल सीजन 11 में जहां उन्होंने हैदराबद को 178 के स्कोर पर रोक दिया। इससे पहले ऐसा लग रहा था कि हैदराबद 190 के आस-पास का स्कोर बनाएगी। लेकिन एक बार फिर धोनी की किस्मत ने उनका साथ दिया और टीम को 178 पर रोक दिया। इसे संयोग ही कहेंगे की 7 नंबर जर्सी, 7वां आईपीएल फाइनल और फिर हैदराबद के स्कोर मे भी 7 का होना उनके लिए लक्की रहा। ये धोनी की इस सीजन में अपनी टीम को ट्रॉफी दिलाने के लिए बिल्कुल सही बैठता है।
अब इसके लिए क्या कहेंगे की क्या महेन्द्र सिंह धोनी के लिए या तो 7 नंबर लक्की है या फिर उनकी महेनत। लेकिन कुछ भी कहों ये तीन संयोग ऐसे थे जिन्होंने महेन्द्र सिंह धोनी की टीम चेन्नई को एक बार फिर आईपीएल खिताब का दावेदार बनाया।