क्रिकेट में निरंतर अच्छे प्रदर्शन करने वाला बल्लेबाज ही अपनी टीम में जगह बना पाता है नहीं तो उसका टीम के अन्दर- बहार जाना लगा रहता है. आज क्रिकेट में भी आईपीएल में भी नए नए खिलाड़ियों के लिए संजीवनी बनकर आया है. जो हर साल नए नए सितारों की खोज करता है.
आज के इस दौर में प्रत्येक खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए अपने प्रदर्शन को और निखारता है. प्रतिस्पर्धा के इस दौर में खराब फॉर्म टीम के साथ उस खिलाड़ी का भी सरदर्द बनती है.

आज के इस दौर में जब ढेर सारे खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के द्वारा चयनकर्ताओं को प्रभावित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते है तो वहीं दूसरी ओर टीम में मौजूद खिलाड़ी अपने प्रदर्शन में निरंतरता रखने की कोशिश करते है.
टीम इंडिया का एक ऐसा विकेटकीपर बल्लेबाज जो अपने खेल में निरंतरता नहीं रख सका. इसी कारण वह टीम में अन्दर- बाहर होता रहा. मौजूदा समय में कोलकाता की कप्तानी संभाल रहे दिनेश कार्तिक जिन्होंने इस आईपीएल में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर से राष्ट्रीय टीम के लिए दावा ठोक दिया था इसके बाद ही चयनकर्ताओं ने इस खिलाड़ी को फिर से मौका दिया है.

18 मार्च 2018 को जब निदहास ट्राफी का फ़ाइनल मैच खेला जा रहा था. एक समय ऐसा लगा की टीम इंडिया के हाथ से फ़ाइनल की ट्राफी बांग्लादेश ने छीन ली लेकिन तभी दिनेश कार्तिक ने अपना जौहर दिखाते हुए मात्र 8 गेंदों में 29 रन मारकर टीम को ये ट्राफी दिलाने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था .
11 साल में 20 मैच खेलने वाला ये बल्लेबाज पहले ही मैच में रहा था मैन ऑफ द मैच
टी-20 स्पेशलिस्ट कहा जाने वाला ये बल्लेबाज जब मैदान पर बल्लेबाजी करने उतरता है, तो गेंदबाज ये सोचने के लिए विवश हो जाता है, कि इस बल्लेबाज को किधर बाल डालूं.
कार्तिक ने अपने पहले ही टी-20 मैच में बल्लेबाजी से अच्छा प्रदर्शन करते हुए मन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया था. इसके बावजूद इस बल्लेबाज ने अभी तक मात्र 20 टी-20 मैच खेले है.

कब आये और कब चले गए कार्तिक
वैसे तो इस धाकड़ बल्लेबाज की पूरी दुनिया कायल है, लेकिन राष्ट्रीय टीम में इस खिलाड़ी का ना खेल पाना थोडा दुर्भाग्यपूर्ण जरूर है. 1 दिसंबर 2006 भारत और साउथ अफ्रीका के बीच जोहान्सबर्ग में हो रहा टी-20 मैच जो भारत का पहला मैच था, जिसमें वीरेंद्र सहवाग कप्तान थे.
साउथ अफ्रीका ने पहले बैटिंग करते हुए 126 रन बनाए. अब आतिशी बल्लेबाज़ी के दौर में ये रन बेहद मामूली भले ही लग रहे हो उस वक़्त इस प्रकार का स्कोर ही अच्छा माना जाता था.

भारतीय टीम ओपनर बल्लेबाज और उस समय के कप्तान सहवाग ने थोड़ी सधी शुरुआत दी. उसी वक़्त टीम के जल्दी जल्दी 2 विकेट गिर जाने से टीम थोड़ी परेशानी में आ गयी. कोहिनूर साबित हुए महेंद्र सिंह धोनी भी ज़ीरो रन पर अपने स्टंप्स उखड़वा चुके थे.
इस समय टीम की कमान संभाली दिनेश कार्तिक ने जिन्होंने 28 गेंदों में 31 रनों की पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई जिसके लिए उनको मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया.
क्रिकेट के इस दौर में खेल में निरंतरता रखने वाला खिलाड़ी ही टीम का लम्बे समय तक हिस्सा रह सकता है.
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