आईपीएल के 11 सत्र हो चुके है लेकिन एक टीम ऐसी भी है जिसने अपने प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं लाया. ये वो टीम है जिसने अपने फैन्स को निराश ही किया है. आईपीएल के 11 सत्र हो चुके है लेकिन ये टीम खिताब जीतना तो दूर आज तक खिताब के आसपास नहीं पहुंच पायी है.

इस टीम में बहुत सारे खिलाड़ियों को खिलाया गया जिससे टीम की किस्मत बदली जा सके. टीम में बहुत सारे प्रयोग किये गए जो टीम के लिए घातक ही साबित हुए. टीम मैनेजमेंट ने अपने खिलाड़ियों का सही से प्रयोग नहीं किया. खिलाड़ियों का चयन सही ना हो पाना भी टीम के लिए हानिकारक साबित हुआ.
अब हम आपको हम उन खिलाड़ियों के बारे में बताते है जिन्हें आप शायद ही जानते होंगे कि कभी ये टीम के लिए खेले.
महेला जयवर्धने
महेला जयवर्धने जो दिल्ली के कैम्प में 2012 में पहुंचे यहाँ पर उन्होंने 3 साल बिता,ये लेकिन टीम के लिए कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके. मैनेजमेंट के अनुसार टीम को इनके अनुभव का फायदा होने जा रहा था. लेकिन कंधे में चोट के कारण ये टीम से काफी दिनों के लिए बाहर रहे और लौटने के बाद टीम के लिए कोई ख़ास प्रदर्शन नहीं कर सके.
इन्होने 16 मैचों में 335 रन बनाये. इस वर्ष दिल्ली की टीम टॉप पर रही. लेकिन प्ले ऑफ में पहुचने का सपना यहाँ भी टूट गया.

अगले सत्र में इन्होने 15 मैचों में 331 रन बेहद ही साधारण स्ट्राइक रेट 105.75 से बनाये. इस सत्र में टीम पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे रही. 2014 में ये टीम टीम के लिए एक मैच भी नहीं खेल पाए , इसके बाद टीम ने इन्हें रिलीज कर दिया.
मोर्ने मोर्केल
मोर्ने मोर्केल जिन्होंने दिल्ली के लिए 3 सीजन में भाग लिया इन्होने दिल्ली के लिए बेहद ही शानदार प्रदर्शन किया. 2011 से 2013 तक इन्होने दिल्ली के लिए तीन सीजन खेले. 2011 में इन्होने दिल्ली के लिए 13 विकेट लिए जो दिल्ली के लिए जड़ी बूटी साबित हुआ.
दक्षिण अफ़्रीकी टीम के बेहद शानदार गेंदबाज जो अपनी गेंदबाजी के द्वारा विपक्षी टीम के लिए सरदर्द साबित हुआ. 2012 में इन्होने अपने प्रदर्शन से टीम को फायदा पहुंचाया. इस सत्र में मोर्केल ने 26 विकेट हासिल किये और पर्पल कैप के लिए दावेदारी भी ठोक दी थी.

इसके बाद 2013 में 10 मैचों में 7 विकेट हासिल किये . इस सत्र में इनके लचर प्रदर्शन के कारण ही टीम मात्र 3 मैच ही जीत पायी. और पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे रही.
शिखर धवन

सनराइजर्स हैदराबाद के गब्बर बल्लेबाज जिन्होंने अपनी मौजूदा टीम को अपनी बल्लेबाजी के द्वारा आईपीएल के फाइनल तक के सफ़र में अहम योगदान दिया. ये कभी दिल्ली के लिए भी खेलते थे आपको सुनकर अचरज होगा कि इन्होने अपने दिल्ली के साथ खेले गए मैच में बेहद शानदार प्रदर्शन किया था. इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने इनको अपनी टीम में रखने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई. इन्होने इस सत्र में 14 मैचों में 37.44 की बेहतरीन औसत से 340 रन बनाए.
एरोन फिंच
दिल्ली ने 2011 के आईपीएल आक्सन में एरोन फिंच को अपनी टीम में जोड़ने की दिलचस्पी दिखाई. लेकिन मैनेजमेंट ने इनका सही से प्रयोग नहीं किया. जिसके चलते ये अपने प्रदर्शन से टीम को फायदा नहीं पंहुचा पाए.
इस सत्र में इन्होने दिल्ली की तरफ से मात्र 6 मैच खेले और इन मैचो में कुहल 47 रन ही बनाये. इनके इस लचर प्रदर्शन के कारण ही टीम अपने आपको स्थिर नहीं रख सकी.

अगले सत्र में इन्होने दिल्ली के लिए मात्र दो मैच खेले जिनमे इन्होने 55 रन बनाये इसके बाद टीम ने इनको बाहर का रास्ता दिखा दिया.
सिद्धार्थ कौल
हैदराबाद की तरफ से बेहद शानदार गेंदबाजी करते हुए टीम को फाइनल में पहुँचाने में योगदान दिया. सिद्धार्थ कौल ने 2013 से दिल्ली की तरफ से खेलते हुए इन्होने आईपीएल में अपना डेब्यू किया, लेकिन इनको मात्र 6 मैचों में ही खिलाया गया इसमें इन्होने कुल 4 विकेट लिए.

अगलें सत्र में इन्होने दिल्ली की तरफ से खेलते हुए 5 मैचो में मात्र 2 विकेट ही हासिल किये. इसके बाद इनका साथ टीम ने छोड़ दिया.
दिल्ली की टीम में प्रदर्शन कम हुआ है जबकि प्रयोग ज्यादा किये गए है जिसके कारण टीम आजतक आईपीएल खिताब से अभी तक दूर है.
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