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मात्र 6 अन्तर्राष्ट्रीय मैच खेल इस खिलाड़ी ने 2 देशो को दिलाई जीत, इसी की बदौलत अब तक कायम है भारत का दबदबा

क्रिकेट जगत के शुरुआत में सिर्फ दो देशों की टीमों का ही बर्चस्व था. जिसमें एक इंग्लैंड की और दूसरी ऑस्ट्रेलिया की टीम का. इन दोनों देशों की टीम का मुकाबला कोई तीसरी टीम नही कर सकती थी. इस पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड टीम को काफी गुरूर भी था. मगर कंगारुओं का यह गुरूर 1983 में जिम्बाब्वे की टीम ने तोड़ दिया था.

1983 के वर्ल्ड कप का तीसरा मैच जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था. यह मैच जिम्बाब्वे के लिए डेब्यू मैच था. इसलिए जिम्बाब्वे से लोगों को बहुत ज्यादा उम्मीद नही थी और ऐसा माना जा रहा था कि ऑस्ट्रेलिया की टीम आसानी से जीत दर्ज कर लेगी, लेकिन ऐसा हुआ नही था.

डंकन फ्लेचर के प्रदर्शन ने दिला दी थी जिम्बाब्वे को जीत 

डंकन फ्लेचर ने वर्ल्ड कप के इस मैच में जबरदस्त प्रदर्शन किया था. जिंबाब्वे ने पहले खेलते हुए निर्धारित 60 ओवर में 239 रन बनाए. जिंबाब्वे की तरफ से सबसे ज्यादा 69 रन फ्लेचर ने बनाए.

ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 240 रन बनाने थे. उस समय ऑस्ट्रेलिया में एलन बॉर्डर जैसे दिग्गज बल्लेबाज मौजूद थे. लेकिन डंकन फ्लेचर ने अपनी घातक गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी.

दाएं हांथ के तेज गेंदबाज फ्लेचर ने 11ओवर में 4 विकेट लिए. जिससे ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम सिर्फ 226 रनों पर ही सिमट गयी थी.

फ्लेचर के इस शानदार प्रदर्शन की वजह से उन्हें मैन ऑफ़ द मैच चुना गया था. 1983 वर्ल्डकप उनके करियर का आगाज ही नहीं अंत भी था. 20 जून 1983 के बाद फ्लेचर ने कभी कोई इंटरनेशनल मैच नहीं खेला.

टीम इंडिया को पहुंचाया ऊंचाईयों पर 

 

2011 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय टीम के नए कोच की तौर पर डंकन फ्लेचर को नियुक्त किया गया था. इसके बाद चार साल तक वह टीम इंडिया के कोच रहे.

इस दौरान 2013 में भारत ने फ्लेचर के कार्यकाल में लगातार आठ सीरीज जीती थी. जिसमें चैंपियन ट्रॉफी भी शामिल है. इसका मतलब पहले जिम्बाब्वे और फिर भारत दोनों देशों की टीम को रिकॉर्ड तोड़ जीत दिलाने में फ्लेचर की अहम भूमिका रही.

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