भारतीय क्रिकेट टीम में यो-यो टेस्ट एक विवाद बनकर सामने आया है, जिसको लेकर हर कोई सवालिया निशान उठा रहा है और अब पूर्व क्रिकेटर कपिल देव ने कहा है कि यो-यो टेस्ट को क्लियर का खिलाड़ी का अंतिम पैमाना नहीं होना चाहिए। भारतीय टीम ब्रिटेन के दौरे पर है जहाँ उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ तक़रीबन तीन महीने तक क्रिकेट खेलना है।

आईपीएल के 11वें सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से शानदार बल्लेबाजी करते हुए अंबाती रायडू ने कुल 602 रन बनाये थे, जिसमें इन्होंने एक शतक भी बनाया। इस कारण लंबे अरसे बाद उनकी भारतीय वनडे टीम में वापसी हुई, लेकिन इस अनिवार्य यो-यो टेस्ट को क्लियर नहीं कर पाए और बाहर होना पड़ा फिर इसके बाद उनकी जगह सुरेश रैना को जगह दी गयी है।
1983 में अपनी कप्तानी में भारत को विश्व विजेता बनाने वाले दिग्गज क्रिकेटर ने कहा, “यदि कोई खिलाड़ी फिट है, तो उसे खेलना चाहिए और कोई अन्य मानदंड नहीं होना चाहिए।”

पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी कहा कि एक गेंदबाज के लिए बल्लेबाज की तुलना में टेस्ट को क्लियर करना शायद आसान होता है और इस प्रकार यह किसी खिलाड़ी की क्षमताओं का न्याय करने का अंतिम परीक्षण नहीं होना चाहिए और चाहे वह अपने पूर्ण प्रदर्शन पर खरा न भी उतरे।

गौरतलब हो कि भारत 3 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का आगाज करने वाला है, जिसमें तीन वनडे मैच टी-20 की सीरीज के बाद खेलेगा। इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ आज से दो टी-20 मैचों की सीरीज का आगाज होने वाला है।
इंग्लैंड के खिलाफ अंबाती रायडू को वनडे में मौका दिया गया था लेकिन बाहर हो गए। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में मोहम्मद शमी भी इस टेस्ट को क्लियर नहीं कर पाए थे और परिणामस्वरूप बाहर हुए और साथ ही भारत ए टीम में संजू सैमसन को यह करारा झटका लगा है।
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