बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने यो-यो टेस्ट के इस्तेमाल पर राष्ट्रीय पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण चयन प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए हैं। यो-यो टेस्ट जो इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। इस टेस्ट को क्लियर करना भारतीय टीम के लिए अब बिलकुल अनिवार्य कर दिया गया है और अगर कोई खिलाड़ी पास करने में नाकाम रहते है तो उन्हें बाहर कर दिया जाता है।

बता दें कि आईपीएल के 11वें सीजन में शानदार प्रदर्शन करने वाले अंबाती रायडू और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों ने अच्छे प्रदर्शन के बाद भारत ए और भारत की मुख्य टीम में जगह बनाई थी लेकिन यो-यो टेस्ट की वजह से दोनों ही खिलाड़ियों को बाहर होना पड़ा है।
इसी बीच बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने अब यो-यो टेस्ट को लेकर कई सवाल उठाये है, इन्होंने (CoA) को लिखे गए गए लेटर में उन्होंने पूछा कि किसने इस टेस्ट को अनिवार्य बनाने का फैसला लिया है और क्या इसके कोई सबूत है कि इस टेस्ट का समर्थन करते हो।
इसके बाद चौधरी ने कहा है कि, “किस मंच पर यह निर्णय लिया गया था कि इस अनिवार्य यो-यो टेस्ट में कम से कम स्कोर करने वाले खिलाड़ियों को बीसीसीआई द्वारा चुनी गई टीम में जगह नहीं दी जायेगी। उस मीटिंग में कौन-कौन शामिल थे, जिन्होंने यह यो-यो टेस्ट का फैसला किया। सुनने को यह मिला था कि मीटिंग के वीडियो है, लेकिन कहां है ये वीडियो।”

वहीं चौधरी ने ये भी सवा किया कि, “अगर पिछले कुछ समय में खिलाड़ी खेल रहा हो और फिर उनका टेस्ट किया जाता है तो यह तो आपको भी पता है कि वह थका हुआ है, तो क्या वो टेस्ट में सफल हो पायेगा और पूरे स्कोर कर पायेगा। एक और सवाल जो खिलाड़ी अच्छी फॉर्म में है और वो अगर इस यो-यो टेस्ट को क्लियर नहीं कर पाए तो क्या उन्हें बाहर कर दिया जाएगा।”
इस प्रकार कोषाध्यक्ष ने कुल मिलाकर यो-यो टेस्ट को लेकर ये कई बड़े-बड़े सवाल उठाये है। भारतीय टीम में अब तक युवराज सिंह, सुरेश रैना, मोहम्मद शमी, अंबाती रायडू और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी इस टेस्ट में फेल हो चुके है।
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