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भारतीय टेस्ट क्रिकेट की वो काली रात, जब शून्य के स्कोर पर ही लगभाग आधी भारतीय टीम लौट गई थी पवेलियन में

कहा जाता है जो फर्श पर होता है वही अर्श पर पहुचता है और जो अर्श पर होता है वही फर्श पर आता है. आज के दौर में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए स्वर्णिम युग है. ये टीम इस समय पूरी दुनिया की टीमों से लड़ने की क्षमता रखती है. आज टीम में इस प्रकार के प्रतिभावान खिलाडी है जो अकेले दम पर पूरे मैच को पलटने का माद्दा रखते है.

1952 और 1962 में चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया ने रचा था इतिहास

लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इंडियन टीम विदेशी टीमों पर जाकर अपना खेल ही भूल जाती थी. मानो ऐसा लगता था जैसे नौसखिया खेल रहे है. टेस्ट क्रिकेट का इतिहास लगभग 141 साल पुराना है. इस दौरान कई एतिहासिक और यादगार मैच खेले गए.

ऐसा ही एक चर्चित मैच साल 1952 में हुआ था। जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर गई थी। चार मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच हेडिंग्ले में आयोजित किया गया। 5 से 9 जून तक चले इस टेस्ट में तीसरे दिन वो सबकुछ हुआ, जिसे देख पूरी दुनिया हैरान हो गई।

टेस्ट इतिहास की सबसे खराब शुरुआत, जब जीरो रन पर लगभग आधी भारतीय टीम लौट गई थी पवेलियन

दरअसल भारतीय कप्तान विजय हजारे ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का निर्णय लिया। भारत की पहली पारी 293 रनों पर सिमट गई। मेजबान इंग्लैंड ने भी पहली इनिंग्स में स्कोर बोर्ड पर 334 रन टांग दिए.

पहली पारी में दोनों टीमों ने औसत प्रदर्शन किया था. दूसरी पारी की शुरुआत अब भारत को करनी थी, यही मैच के रुख को बनाने और गंवाने का समय आ गाया था. भारतीय ओपनर बल्लेबाज पंकज रॉय और डी गायकवाड़ बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर उतरे. उधर पहला ओवर फेंकने आये फ्रेड ट्रूमैन, जिनका यह डेब्यू मैच था.

उन्होनें अपने डेब्यू मैच में इस तरह की गेंदबाजी की, जो उनके डेब्यू के लिए इतिहास बन गया. भारतीय टीम इनके सामने जद्दोजहद करती हुई नजर आई. भारतीय टीम का खाता भी नहीं खुला था, लेकिन उनके उनके चार खिलाड़ी पवेलियन पहुच गए थे.

इसमें से तीन विकेट फ्रेड ने लिए जबकि चौथा शिकार एलेक्स ने किया. ये टेस्ट क्रिकेट की सबसे खराब शुरुआत मानी जाती है, जिसमें रन एक भी न बने हो और विकेट चार गिर गए हो.

आठ बल्लेबाज तो दहाई के अंक तक पहुचने के पहले ही हुए धरासायी 

इस टेस्ट मैच में भारत के 8 बल्लेबाज तो दहाई के अंक तक नहीं पहुच पाए थे. वो तो शुक्र रहा कप्तान विजय हजारे साहब का जिन्होंने कप्तानी पारी खेलते हुए भारतीय टीम की लाज बचाई.

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विजय हजारे ने इस मैच में 56 रन बनाये, जबकि एक अन्य बल्लेबाज पाढ़कर ने 64 रन  की उपयोगी पारी खेली. दूसरी पारी में भारत 165 रन बनाए जिसे इंग्लैंड की टीम ने 3 विकेट के नुकसान पर ही हासिल कर लिया.

 

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