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‘मरियप्पन थंगावेलु’ देश का ऐसा अभिमान जिसने अपनी लाचारी को मात दे कर एक पैर से लगाई गोल्डन छलांग

नई दिल्ली। कहते है कि जब इंसान कुछ करने की ठान ले तो चाहे जितनी कठिनाई सामने आए तो भी उसे नहीं रोक सकती। इसी बात को साबित किया है भारत के ऊंची कूद के खिलाड़ी मरियप्पन थंगावेलु ने। एक पैर न होने के बावजूद भी थंगावेलु ने देश का सम्मान बढ़ाया।

पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का मान बढ़ाने वाले मरियप्पन थंगवेलु महज पांच साल की उम्र में अपनी एक टांग गंवानी पड़ी। वह अपने घर के बाहर खेल रहे थे जब एक बस ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में उनकी दायीं टांग घुटने से नीचे पूरी तरह कुचली गई। उनका पैर पूरी तरह बेकार हो चुका था। लकिन उनके हौसलों में कमी नहीं आई।

आपको बता दे 9 सितम्बर, 2016 को उन्होंने पुरुषों की टी42 ऊंची कूद में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। ब्राजील की राजधानी रियो डी जनेरो में हो रहे पैरालिंपिक खेलों में मरियप्पन ने सोने की छलांग लगाई थी।

मरियप्पन को भारत सरकार की ओर से पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर 75 लाख रुपये की इनामी राशि तो मिली ही है, साथ ही तमिलनाडु सरकार ने भी उन्हें दो करोड़ रुपये का पुरस्कार देने का ऐलान किया है।

पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मरियप्पन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री विजय गोयल के अलावा तमाम हस्तियां बधाई दी थी।

मरियप्पन उन सभी के लिए एक प्रेणना है जो शरीरी रूप से विकलांग है। उन्होंने ये साबित कर दिखाया कि इंसान के हौसले बुलंद हो तो दुनिया की कोई ताकत उसे नहीं रोक सकती।

आज उनके जन्मदिन पर हम उन्हें ढेर सारी बधाई देते है और कामना करते है कि वो निरंतर ऐसे ही कामयाबी की तरफ बढ़ते रहें।

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