वोल्गोग्राद
फीफा विश्व कप फुटबॉल के नॉकआॅउट की होड़ से बाहर हो चुके सऊदी अरब और मिस्र सोमवार को जब अपने आखिरी मैच के लिए आमने- सामने होंगे तो उनका एक ही लक्ष्य होगा जीत के साथ विदाई लेना। इस मुकाबले को जीतने वाली टीम ग्रुप में अंतिम स्थान पर आने की शर्मिंदगी से बच जायेगी। दोनों टीमें अपने पहले दोनों मुकाबले हार कर टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी हैं।
मिस्र को इस टूर्नामेंट में अपनी टीम से काफी उम्मीदें थी लेकिन उसके स्टार स्ट्राइकर मोहम्मद सालाह विश्व कप से पहले चोटिल हो गए और पहले मैच में नहीं खेल पाए जिसे उसने उरुग्वे से 0-1 से गंवाया। सालाह दूसरे मैच में खेलने उतरे लेकिन वह अपने रंग में नहीं दिखाई दिए और मिस्र ने यह मैच रूस को 1-3 से गंवा दिया। 1990 के बाद से पहला विश्व कप खेल रहा मिस्र इन पराजयों से ग्रुप दौर में ही बाहर हो गया जबकि उसे अगले दौर में पहुंचने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।सालाह के लिए सांत्वना की बात यही रही कि उन्होंने रूस के खिलाफ एकमात्र गोल किया।
दूसरी तरफ सऊदी अरब को अपने पहले मैच में रूस के हाथों 0-5 से और उरुग्वे से 0-1 से पराजय मिली थी। इस एशियाई टीम का यही लक्ष्य होगा कि वह कम से कम एक गोल कर विश्व कप से विदा ले। यदि मिस्र के 45 वर्षीय गोलकीपर एसाम अल हादरी इस मुकाबले में खेलने उतरते हैं तो वह विश्व कप में खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन जाएंगे। उन्हें पिछले दो मैचों में नहीं उतारा गया था।