तुलना एक ऐसी चीज है जो हर तरह क्षेत्र में होती है। तुलना यानि दो चीजों के बीच में श्रेष्ठता को चुनना जो खेल के मैदान में अक्सर ही देखने को मिलती है। चाहे जो खेल हो समय-समय पर खिलाड़ियों की अपने दौर से दूसरे दौर के खिलाड़ी के बीच तुलना होती है। कुछ उसी तरह से वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की तुलना भारतीय टीम के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से की जाती है।
इन कारणों से नहीं होनी चाहिए कोहली-सचिन की तुलना
जी हां, मौजूदा दौर के सबसे शानदार बल्लेबाजों में से एक विराट कोहली की इससे पहले के दौर के दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से तुलना की जाती रही है। विशेषज्ञों के साथ ही क्रिकेट प्रशंसक भी किसी ना किसी तरह से कोहली को सचिन तेंदुलकर के समकक्ष मानते हैं। लेकिन तुलना होना एक स्वाभाविक बात जरूर है, लेकिन ये होनी नहीं चाहिए। क्योंकि अपने-अपने दौर के लिए सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली दोनों ही सर्वश्रेष्ठ हैं।

आपको आज हम वो पांच कारण बताते हैं जिससे नहीं होनी चाहिए विराट कोहली की सचिन तेंदुलकर के साथ तुलना…
फिटनेस का स्तर हुआ ऊंचा
आज वर्तमान समय में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली की फिटनेस विश्व क्रिकेट में सबसे अच्छी मानी जाती है। विराट कोहली अपनी फिटनेस को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। साथ ही इस समय फिटनेस प्राप्त करने के लिए ऐसे साधन उपलब्ध है, जिससे इसको मैंटेन किया जा सकता है। लेकिन वहीं सचिन तेंदुलकर के समय इतने साधन नहीं थे फिर भी उन्होंने अपने आपको ऐसा फिट रखा कि 24 साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते रहे।

सचिन ने किया दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों का सामना
सचिन तेंदुलकर विश्व क्रिकेट के महान बल्लेबाज ऐसे ही नहीं बने हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों का सामना किया है। सचिन तेंदुलकर के दौर में माना जाता है कि क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा दिग्गज गेंदबाज हुए हैं। इस दौरान सचिन तेंदुलकर ने वसीम अकरम, वकार यूनिस, शोएब अख्तर, कर्टनी वाल्श, कर्टली एंब्रोज, ग्लेन मैक्ग्राथ, शेन वार्न, मुथैया मुरलीधरन और एलन डोनाल्ड जैसे गेंदबाजों का सामना किया है।
इन गेंदबाजों का नाम सुनकर ही बल्लेबाजों के पसीने छुटने लगते थे, लेकिन सचिन ने इनका बखूबी सामना किया तो वहीं विराट कोहली के दौर में इतने ज्यादा खतरनाक गेंदबाद देखने को नहीं मिले हैं।

कड़े नियम
पिछले कुछ सालों में क्रिकेट के खेल में बल्लेबाजों के लिए बदले नियमों ने राह बहुत आसान कर दी। पहले क्रिकेट के नियम हर मामले में बहुत की कड़े होते थे। पिच भी बहुत ही मुश्किल होते थे। जहां पर खेलना इतना आसान नहीं रहता था। साथ ही वनडे क्रिकेट में पहले ही तरह पावर प्ले नहीं होता था, बल्कि फील्डिंग की पाबंदी पहले 15 ओवर में ही होती थी जब खौफनाक गेंदबाजों के खिलाफ जमने में ही निकल जाते थे। लेकिन अब नियमों के आसान होने से बल्लेबाजी भी आसान हो चली है।

बल्ले, गेंद और मैदान हुए रन बनाने के लिए आसान
सचिन तेंदुलकर के दौर में मैदान बहुत ही खतरनाक हुआ करते थे। एक ओर जहां पिच मुश्किल होती थी साथ ही मैदान की आउट फील्ड भी बहुत ही धीमी होती थी जब गेंद गैप से निकलने के बाद भी तेजी से नहीं भाग पाती। साथ ही गेंद और बल्ले में भी पहले कुछ वजन हुआ करता था, जिससे रन बनाना आसान नहीं होता था, लेकिन अब मैदान की आउट फील्ड बहुत ही तेज हो गई है साथ ही गेंद ऐसी बनने लगी है, जो बल्ले से लगते ही भागने लगती है। उसी तरह का हाल बल्ले का भी है। जो बहुत हल्के होने लगे हैं ।

टी-20 क्रिकेट के चलन ने बदली मानसिकता
पिछले 10 सालों में क्रिकेट के गलियारों में टी-20 क्रिकेट ने बहुत तरक्की की है। अब टी-20 क्रिकेट बहुत ज्यादा खेले जाने लगे हैं जिससे बल्लेबाजों की मानसिकता को बदला है।
अब बल्लेबाज पिच पर आते ही बल्ले घुमाने लगते हैं और गेंद को मैदान के बाहर फेकने में सफल होते हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं था तब बल्लेबाज को पिच पर टिक कर खेलने की जरूरत होती थी तब शॉट्स खेलना इतना आसान नहीं होता था।

कोहली की जिम्मेदारी उनके साथियों ने की कम
एक दौर था जब भारतीय क्रिकेट टीम की बल्लेबाजी की जिम्मेदारी पूरी तरह से सचिन तेंदुलकर के कंधों पर होती थी। वो 1990 का दौर जब भारतीय टीम सचिन पर बहुत ज्यादा निर्भर हुआ करती थी और तब सचिन तेंदुलकर के नहीं चलने पर पूरी टीम की बल्लेबाजी की पोल खुलने लगती थी, लेकिन वहीं अब विराट कोहली पर टीम पूरी तरह से निर्भर नहीं है। उनको अपने साथियों से बल्लेबाजी में अच्छा साथ मिलता है। टीम में रोहित शर्मा और शिखर धवन रन बनाने में कोहली से पीछे नहीं होते हैं।

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