चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान धोनी इस समय हर जगह छाए हुए है वो चाहे खेल का मैदान हो या कहीं और, अगर कहीं भी क्रिकेटर का अगर नाम भी लिया जायेगा तो उसमें कैप्टेन कूल का नाम अवश्य आएगा. धोनी ने अपनी प्रतिभा के बल पर सबके दिलों में जगह बनायीं है. धोनी खिलाडियों के लिए एक बेहतर उदारहण साबित हुए है, जिनसे युवा खिलाड़ियों को सीखना चाहिए.
खिलाड़ियों को मैदान पर खेलभावना के साथ खेलना चाहिए. कभी खेलभावना के प्रतिकूल कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए. जिससे आपकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़े. इस बात को हमेशा ध्यान में रखकर खेलना चाहिए.

खेल के मैदान पर बहुत बार इस तरह की घटनाएं देखी गयी है जिसमें खिलाड़ियों द्वारा खेलभावना के साथ खिलवाड़ किया गया है अभी हाल में ही हुई डेविड वार्नर और क्विंटन डीकाक के बीच हुई नोकझोंक हुई. वहीँ दूसरी ओर एक ऐसा खिलाड़ी भी है जिसने खेलजगत में कभी इस प्रकार के कार्य नहीं किये. जिससे खेल को नुकसान पहुचे.जिसके कारण उनको महान खिलाड़ी का दर्जा प्राप्त है.
धोनी ने अपनी कप्तानी के दौरान आईसीसी टी -20 वर्ल्ड कप 2011, आईसीसी वर्ल्ड कप 2013, चैम्पियंस ट्राफी 2017 जैसे खिताबों से टीम को नवाजा है.
उदाहरण जो धोनी को महान क्रिकेटर बनाते है
आखिरी मैच में दादा को सौपी टीम की कमान

दादा कहे जाने वाले सौरव गांगुली आस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच नवम्बर 2008 में खेल रहे थे. धोनी ने दादा को उस मैच की कप्तानी सौपने का मन बनाया जिसे दादा मना भी नहीं कर सके.
तब धोनी की तारीफ में खूब कसीदे पढ़े गए. सौरव गांगुली ने भी इस तरह की विदाई मिलने के लिए धोनी की तारीफ की थी.
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