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सिर्फ एक कैच लेने के लिए आज के दिन ही हुआ था इस खिलाड़ी का जन्म, अब चला रहा जेल की वैन

2007 में हुए वर्ल्डकप मैच जिसकी मेजबानी विंडीज कर रहा था. उस समय बरमूडा क्वालीफाई करके विश्वकप टीमों के पूल में पहुंची थी. विश्वकप के 12 वें मैच में बरमूडा टीम मौजूदा चैंपियन टीम इंडिया से खेल रही थी. टीम इंडिया की ओपनिंग जोड़ी रोबिन उथप्पा और सौरव गांगुली बैटिंग करने उतरे थे.

 

 

दूसरे ओवर की पहली गेंद उथप्पा के बल्ले से लगी और स्लिप पर खड़े उस खिलाड़ी के हाथों में समा गई जिसका जन्म ही मानो ये कैच लेने के लिए हुआ था. कैच लेते ही ड्वेन पूरे मैदान पर भागे. वह इतना भागा मानो विश्वकप जीत लिया हो.

बरमूडा के स्पिन गेंदबाज  ड्वेन लेवरॉक जो बालर कम बाउंसर ज्यादा लगते है. बालर से ज्यादा बाउंसर लगने वाले  जब टीम को स्लिप की जरूरत नहीं होती थी तो उसे फील्ड पर कहीं और खड़ा करना मुश्किल हो जाता था. बरमूडा के लिए 32 वनडे इंटरनेशनल मैच खेलने वाले इस खिलाड़ी ने साल 2009 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया.

अपना घर चलाने के लिए ड्वेन अब एक जेल की वैन चलाते हैं और अपने एक इंटरव्यू में कहते हैं कि इंडिया के खिलाफ वो मैच और उसमें भी वो कैच लेना उनके जीवन का सबसे खुशनुमा पल था.

 

 

वहीं इंग्लैंड के खिलाफ मैच में केविन पीटरसन को स्टंप आउट करना, पुलिस की नौकरी करते हुए अपराधियों को पकड़ने से भी ज्यादा मुश्किल था.

इस कैच को पकड़ने के बाद ड्वेन इस तरह मैदान के चारो और भागे थे मानो उनको कोई मैदान के चारो और दौड़ा रहा हो. इस प्रकार के कई किस्सा क्रिकेट की दुनिया में देखने को मिलता है,

इसी प्रकार का एक उदाहरण क्रिकेट के मैदान पर दिखाता है दक्षिन  अफ्रीका के स्पिनर गेंदबाज ताहिर भी विकेट लेने के बाद इसी तरह पिच के चारों और चक्कर काटते हुए नजर आते है.

 

 

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