ज़िम्बाब्वे क्रिकेट काफी बुरे दौर से गुजर रहा है। टीम लगातार मैच हार रही है और बोर्ड के पास पैसों नहीं है। जिसके कारण बोर्ड खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को पैसे नहीं दे पा रही है। इसके लिए ज़िम्बाब्वे क्रिकेट ने आईसीसी ने मदद मांगी है, ताकि सभी का बकाया भुगतान किया जा सके।
बीसीसीआई है इससे परेशान
ज़िम्बाब्वे क्रिकेट के आईसीसी से मांगी गयी मदद के बाद भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड के कान खड़े हो गए हैं। बीसीसीआई के अधिकारी के अनुसार आईसीसी किसी भी देश को दोबारा फंडिंग कैसे दे सकता है।
फाइनेंसियल और मैनेजमेंट अधिकारी ने यह भी कहा कि ज़िम्बाब्वे में गवर्नेंस की कमी है और वहां की इकनोमिक कंडीशन भी ऐसी है, जिससे रेवेन्यू आना मुश्किल है।
उनके अनुसार आईसीसी पहले ही ज़िम्बाब्वे को काफी पैसे दे चुकी है और इसके बाद भी देने का विचार बना रही है। अधिकारी के अनुसार ज़िम्बाब्वे क्रिकेट को पिछले वित्तीय वर्ष में $10,609,000 मिले थे।
ज़िम्बाब्वे क्रिकेट में है बदलाव की जरूरत
अधिकारी को यह भी लगता है की ज़िम्बाब्वे क्रिकेट में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा
“हमें ज़िम्बाब्वे क्रिकेट को फिर से ट्रैक पर लाने के लिए काम करना पड़ेगा, लेकिन इसके लिए सबसे पहले वहां की फाइनेंसियल और मैनेजमेंट में बदलाव की जरूरत हैं। इसके बाद ही कुछ हो सकता है।”
खिलाड़ियों ने खेलने से किया था इंकार
साल ही में ज़िम्बाब्वे में टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की त्रिकोणीय सीरीज आयोजित की गई थी। इसके बाद ज़िम्बाब्वे और पाकिस्तान के बीच 5 मैचों की वनडे सीरीज भी खेली गई थी।
इन सीरीजों में ज़िम्बाब्वे के कई प्रमुख खिलाड़ियों ने पैसे नहीं मिलने की वजह से खेलने से इंकार कर दिया था। जिसमें ब्रेंडन टेलर, सिकंदर रजा, ग्रीम क्रेमर, शॉन विलियम्स और क्रेग एर्विन जैसे बड़े नाम शामिल थे।
यही कारण रहा कि इन दोनों ही सीरीज में ज़िम्बाब्वे टीम की करारी हार हुई।
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