वेब डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली में कई ऐसे डेस्टिनेशनस हैं जो ऐतिहासिक होने के साथ- साथ काफी खूबसूरत भी हैं। ये डेस्टिनेशनस पर्यटको को अपनी ओर खिंचती हैं और दिल्ली घूमने आने वाले पर्यटक यहां एक बार आना जरूर पसंद करते हैं। आपने कुतुबमीनार का नाम जरूर सूना होगा या फिर इस एतिहासिक स्थल को देखा भी होगा। दिल्ली में कुतुबमीनार को देखने के लिए प्रतिवर्ष सैकडों की संख्या में पर्यटक आते हैं। कुतुबमीनार भारत के इतिहास की अनुठी पहचान हैं मगर क्या आपने कभी भारत के दूसरे कुतुबमीनार को देखा हैं। जीहां आज हम आपको बतायेंगें दिल्ली के दूसरे कुतुबमीनार के बारें में और इससे जूडी कुछ दिलचस्प जानकारियों के बारें में....
देश की राजधानी दिल्ली में कुतुबमीनार की तरह दिखने वाली हूबहू इमारत भी बनी हुई हैं जिसे दिल्ली के दूसरे कुतुबमीनार के नाम से जाना जाता हैं। इस दूसरे कुतुबमीनार का असली नाम हस्तसाल की लाट हैं। यह हस्तसाल की लाट दिल्ली में स्थित नांगलोई के पास हस्तसाल गांव में निर्मित हैं। दिल्ली के इस दूसरे कुतुबमीनार की जानकारी बहुत कम लोगो को हैं जबकि मुख्य कुतुबमीनार को देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग आते हैं। इस कुतुबमीनार को ऐतिहासिक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए यहां के निवासियों ने आंदोलन भी किये थे मगर आज तक इसका कोई सकारात्मक परिणाम नही आया हैं।
दिल्ली में बना हस्तसाल की लाट नामक इस इमारत का निर्माण 1650 में हुआ था।ये तकरिबन 17 मीटर ऊंचा बना हुआ हैं। इस इमारत का निर्माण शाहजहां ने करवाया था और इस इमारत को बनाने का मकसद था कि इसे शिकारगाह के रूप में काम लिया जा सकें। इस इमारत के पास एक पतली सीढी बनी हुई हैं। इसकी बनावट हूबहू असली कुतुबमीनार की तरह हैं। पहले के जमाने में यहां हाथी विश्राम किया करते थे और इसी कारण से इसका नाम हस्तसाल की लाट रखा गया। इस इमारत में 2 मंजिले बनी हुई हैं। अगर आप इसके इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं तो एक बार यहां जरूर आयें।
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