भारतीय ए और बी टीम को 17 अगस्त से ऑस्ट्रेलिया ए और साउथ अफ्रीका ए टीम के साथ चतुष्कोणीय सीरीज खेलनी है. इस सीरीज के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले मनोज तिवारी को इंडिया ए व इंडिया बी टीम दोनों से ही नजरंदाज किया गया है.
मनोज तिवारी ने निकलवाये आँकड़े

विजय हजारे ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी को मिलाकर मनोज तिवारी का 126.75 का औसत था और उन्होंने सीजन 2017-18 में कुल 507 रन बनाये थे. उनके इस शानदार प्रदर्शन के बाद भी चयनकर्ताओं ने ना तो उन्हें इंडिया ए और ना ही इंडिया बी टीम में जगह दी है.
मनोज तिवारी ने खुद एक आंकड़े निकालने वाले व्यक्ति से ऐसे आँकड़े निकलवाये है. जिन्हें 100 से ऊपर की घरेलू लिस्ट ए की औसत रखने के बावजूद टीम में जगह नहीं दी गई है.
How many batsmen are there in the history of Indian cricket who has an average of 100 plus in the Vijay Hazare and Deodhar trophy both in the same year ??
— MANOJ TIWARY (@tiwarymanoj) July 23, 2018
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High batg ave in List A domestic season
(min 400 runs)
126.75 M Tiwary (Ben,IndB) 507runs 2017/18
114.40 M Manhas (Del,NZo) 572r 2005/06
110.50 I Jaggi (Jhar,EZo) 442r 2008/09
109.75 VKambli (Mum,WZo) 439r 2001/02— Mohandas Menon (@mohanstatsman) July 24, 2018
चयनकर्ताओं पर फूटा गुस्सा

मनोज तिवारी ने अपने एक बयान में क्रिकइन्फो से बात करते हुए कहा, “मुझे उम्मीद थी, कि मैं इंडिया ए के लिए चुना जाऊँगा, क्योंकि मैंने 50 ओवर की क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था. मैंने एक सीजन में सबसे ज्यादा औसत से बल्लेबाजी करने का रिकॉर्ड भी बनाया, लेकिन मुझे इसके बावजूद नहीं चुना गया. मैं इस बात से निराश जरुर हूं.
दुनिया में हर कोई जानता है, कि उम्र सिर्फ एक संख्या है. मैं अब 32 साल का हो गया हूं और मुझे बाहर करने का यह कारण नहीं होना चाहिए.
आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजी की औसत उम्र में एमएस धोनी की प्रतिक्रिया को सभी ने सुना था. अगर खिलाड़ी मैदान पर प्रदर्शन कर सकता है, तो उम्र का रोड़ा नहीं होना चाहिए और जहां तक फिटनेस का सवाल है, मैं हमेशा उस पैमाने पर खरा उतरता हूं.
मुझे नहीं पता कि मुझे और क्या करना है, चयनकर्ताओं ने मुझसे फिटनेस को लेकर भी कोई बात नहीं की है. मैं चयनकर्ताओं से अपने ना चुने जाने का कारण पूछना चाहता हूं. अगर मुझे पता चल जाए कि उनका पैरामीटर क्या हैं, तो जाहिर है कि मैं उनके अनुसार ही अपनी योजना बनाउंगा.”
भारत के लिए खेलना मेरा सपना

मनोज तिवारी ने आगे कहा, “मेरा अभी भी भारत के लिए खेलने का एक सपना है और इसी रस्ते में अपने इस सपने को पूरा कर सकता हूं. मुझे अबतक राहुल द्रविड़ भाई के अंडर खेलने का अवसर नहीं मिला है. वह एक ईमानदार व्यक्ति है और मैं उनके साथ काम करना चाहता हूं, लेकिन पता नहीं चयनकर्ता मुझे अनदेखा क्यों कर रहे है.
मुझे अहसास हो रहा है, कि लोग अब सिर्फ स्कोरकार्ड देख रहे है. यह नहीं समझना चाहते है, कि खिलाड़ी ने किस परिस्तिथि में किस पिच पर और किस विपक्षी के खिलाफ खेला है.
पिछले सीज़न दलीप ट्रॉफी में, मैंने लखनऊ की टर्निंग विकेट पर 35 रन बनाए थे और मैं अंपायर ने मुझे गलत आउट दिया था. बाद में अंपायर ने मुझसे माफ़ी भी मांगी थी, लेकिन अब शायद चयनकर्ता ये सब चीजें नहीं देखते है. उन्हें सिर्फ व्यक्तिगत संख्या से मतलब है.”
शतक के बावजूद टीम से ड्राप होने पर हुई थी निराशा
मनोज तिवारी ने आगे कहा, “मैं अब एक क्रिकेटर के रूप में परिपक्व हो गया हूं, एक व्यक्ति के रूप में, मैने बहुत सी चीजों का अनुभव किया है. भारत के लिए शतक लगाने के बाद, मैं 14 मैचों तक प्लेइंग से बाहर था. यह भी समझ में आता है, क्योंकि यह भारतीय टीम है. लेकिन ऐसे में आप निराश हो जाते हैं, क्योंकि मैं भी इंसान हूँ.
यह एक टीम का निर्णय था और मैं इसे स्वीकार करता हूं, लेकिन मैं इसे नहीं भूल सकता. मैने शतक बनाया और टीम से ड्राप कर दिया गया. यह मेरे दिमाग में हमेशा बना रहता है.
मैं इंडिया ए टीम में अपनी जगह बनाने के लिए अभी भी आशावादी हूं. मैं मैदान पर प्रदर्शन कर सकता हूं और मैं भारत की टीम में भी अपनी जगह बना सकता हूं.
मैं अंबाती रायुडू और सुरेश रैना की तरह मजबूत रहना चाहता हूं. मुझे पता है कैसे टीम में वापसी की जाती है, मुझे बस एक मौका चाहिए. मैं इसलिए पहले भारत ए के लिए खेलना चाहता हूं.
फिलहाल वर्तमान में मैं कोलकाता में क्लब क्रिकेट खेल रहा हूं, जिसके कारण मैंने इस सीजन में ढाका प्रीमियर लीग भी नहीं खेला, लेकिन मैं अगले साल जरुर ढाका प्रीमियर लीग खेलने की योजना बनाऊंगा.”
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