सिटी डेस्क। लोग हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर चाहे कितना ही लड़े लेकिन आज भी धर्म और जातिवाद से परे कई लोगों में इंसानियत बची हैं। जहां एक ओर देश के दुश्मन हिन्दुस्तान को धर्म और जातिवाद में बांटने का प्रयास कर रहा हैं वहीं ऐसे लोगों को चुनौती दे रहा हैं मध्यप्रदेश के इंदौर शहर का एक जैन परिवार। दरअसल यह परिवार बीते आठ साल से एक मुस्लिम बच्ची का पालन पोषण कर रहा हैं जिसकी मां उसे छोड़कर चली गई थी।
जहां आजकल लोग अपनों के नहीं होते वहां जब कोई पराये गमों को गले से लगा ले तो आश्चर्य तो होगा ही और आज इस परिवार ने इंसानियत की मिसाल कायम कर दी हैं। इस परिवार ने बच्ची को कानूनी प्रक्रिया पूरी करके अपना बना चुके हैं। इंदौर के तिलकनगर निवासी रंजना जैन ने यह मिसाल कायम की हैं। रंजना के पति रेलवे स्टेशन पर ट्राली लगाते हैं। सोमवार को रंजना जैन 8 साल की बच्ची के साथ दत्तक ग्रहण शिविर गई। यहां उन्होंने बच्ची का नाम सना बताते हुए उसे कानूनी रूप से फोस्टर केयर में लेने की बात कही। रंजना जैन के इस कदम की शिविर में मौजूद अफसरों ने भी काफी प्रशंसा की।
इसके बाद रंजना जैन बताया कि 8 साल पहले पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार की महिला अपनी 2 माह की बच्ची को छोड़कर कहीं चली गई थी। बच्ची का पिता परवरिश करने में असमर्थ था। जब बच्ची रो रही थी तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने बच्ची को गले लगा लिया। बच्ची मेरे गले लगने के बाद बिलकुल चुप हो गई। उसी समय तय कर लिया कि हम इसे पालेंगे। अब सना हमारे परिवार का एक हिस्सा हैं। मैंने सना को अपनी बेटी की तरह पाला-पोसा। हमने न तो सना का नाम बदला न ही उपनाम।
शिविर के संयुक्त संचालक राजेश मेहरा ने बताया कि जैन समाज की यह पहल समाज के लिए अनुकरणीय हैं। सना की परवरिश के लिए फोस्टर केयर से परिवार को 2 हजार रुपए दिए जाएंगे। शिविर में जैन दंपती ने सना को कानूनी रूप से फोस्टर केयर में लिया ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी अड़चन का सामना न करना पड़े।
Herald