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मोदी सरकार से खफा हैं पूर्व हॉकी कप्‍तान मोहम्मद शाहिद की पत्‍नी, लौटाएंगी सारे अवार्ड

लाइव सिटीज डेस्क : भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्‍तान और ड्रिबलिंग के जादूगर पद्मश्री स्‍व मोहम्‍मद शाहिद की पत्‍नी परवीन ने सरकार की वादाखिलाफी से नाराज होकर पति को मिले सभी सम्‍मान वापस करने की बात कही है. इसके लिए उन्होंने 20 जुलाई का दिन और जगह दिल्‍ली चुना है. दो साल पहले इसी दिन मोहम्‍मद शाहिद का इंतकाल हुआ था. मोहम्‍मद शाहिद की पत्‍नी परवीन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पति की मौत के बाद सरकार की ओर से बड़े-बड़े वायदे किए गए थे, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है, जिसके कारण पूरा परिवार काफी निराश है. इस बारे में पीएमओ को पत्र भेजा है.

भारतीय हॉकी टीम को नए मुकाम पर पहुंचाने वाले मोहम्‍मद शाहिद को मिले मेडलों की सूची बड़ी लंबी है. 1980 में मास्‍को में हुए ओलंपिक खेलों में स्‍वर्ण पदक विजेता हॉकी टीम के सदस्‍य रहे मोहम्‍मद शाहिद को 1981 में अर्जुन पुरस्‍कार और 1986 में पद्मश्री सम्‍मान दिया गया था. काफी समय तक बीमार रहने के बाद 20 जुलाई 2016 को मोहम्‍मद शाहिद का निधन हो गया था.

सभी सम्‍मान सरकार को लौटाना चाहती हैं

मोहम्‍मद शाहिद की पत्‍नी का आरोप है कि जब उनके पति का इंतकाल हो गया था तब सरकार ने उन्‍हें कई वादे किए गए थे. आज दो साल बीतने के बाद भी एक भी वादे पूरे नहीं किए गए. इस बात से उनका परिवार काफी निराश है और वह अपने पति को मिले सभी सम्‍मान सरकार को लौटाना चाहती हैं. परवीन का आरोप है कि पीएम मोदी के बनारस आने पर उन्होंने कई बार मिलने का समय मांगा है, लेकिन प्रशासन ने एक बार भी अनुमति नहीं दी.

शाहिद के मौत के बाद सरकार ने किए थे कई वादे

मोहम्‍मद शाहिद की पत्‍नी परवीन का कहना है कि पति के अंतिम संस्‍कार में केंद्र और यूपी सरकार के कई मंत्रियों समेत तमाम लोग शामिल हुए थे. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक संदेश भेज कर दुख जताया था. परवीन ने कहा, ‘सभी ने सहारा देने की बात कहा था, लेकिन हर कोई संकट के दौर में परिवार को भूल गया. उस वक्‍त किया गया एक भी वादा सरकार ने पूरा नहीं किया.’

डीरेका में कार्यरत थे शाहिद

पति की पेंशन के भरोसे परिवार का खर्च चला रहीं परवीन बताती हैं कि दो साल बाद भी बेटे को रेलवे में नौकरी नहीं मिल पाई है, जबकि शाहिद डीरेका में कार्यरत थे. उन्होंने बताया, ‘शाहिद के नाम पर स्‍टेडियम का नाम रखने, उनके नाम पर हॉकी खिलाड़ियों को सम्‍मान देने और राष्‍ट्रीय स्‍तर का टूर्नामेंट भी शुरू नहीं हो सका.’

कई बार की पीएम मोदी से मिलने की कोशिश

परवीन ने बताया, ‘बीते साल शाहिद के जन्‍मदिन पर परिजनों ने ग्रैच्‍यूटी के मिले करीब तीन लाख खर्च कर एक टूर्नामेंट कराया. उस वक्‍त भरोसा दिलाया गया कि जो भी खर्च होगा सरकार वहन करेगी. एक साल बीतने को हैं, अब तक एक पाई भी नहीं मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी बनारस आए उनसे मिलने का समय मांगा, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी.’

सरकार की तरफ नहीं मिली कोई मदद: परवीन

शाहिद की पत्नी का कहना है कि जिसने हॉकी के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी और उसका परिवार गुमनामी की जिंदगी जीए, इससे बड़ा दुर्भाग्‍य और क्‍या हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘सरकार की तरफ से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली. ऐसे में पति को मिले सम्‍मान का क्‍या करूंगी. अर्जुन पुरस्‍कार, पद्मश्री, यश भारती और अन्य सभी सम्‍मान दिल्‍ली जाकर प्रधानमंत्री को वापस कर दूंगी.’

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