हेल्थ डेस्क। भारत में प्राचीनकाल से ही आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्वति का बोलबाला रहा हैं। पहले के समय में ऋषि- मुनि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्वति से सभी रोगों का ईलाज करते थे। आयुर्वेद में अनेक औषधियों का समावेश हैं जो विभिन्न रोगो के ईलाज में काम ली जाती हैं। आयुर्वेद में शतावरी का इस्तेमाल करके सरदर्द, बुखार और खांसी जैसी समस्याओं को पलभर में दूर कर दिया जाता था। दरअसल शतावारी में कई ऐसे गुण निहित हैं जो इन बिमारियों में फायदेमंद होते हैं। शतवारी के नियमित उपयोग से मूत्र में दुर्गंध आने लगती हैं जो बाद में खत्म हो जाती हैं मगर इसका सेवन रोगो में काफी लाभ पहुंचाता हैं। शतावरी में खनिज तत्वों के साथ कई विटामिनस भी पायें जाते हैं। इसके अंदर विटामिन ए, सी, ई, के, और बी6 के साथ- साथ प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती हैं। अगर बात खाने के लिहाज से करें तो शतावरी का सेवन टमाटर और ग्रीन सलाद में भी किया जा सकता हैं एवं जैतून के तेल में पास्ता के साथ भी इसका सेवन किया जा सकता हैं।
अगर आप सिरदर्द करी समस्या से परेशान हैं तो शतावरी आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकती हैं। दरअसल ये औषधी सिरदर्द को खत्म करती हैं। सिरदर्द के दौरान शतावरी को अच्छे से कुट कर इसका रस निकाल लें और इसमें तिल का तेल मिक्स करें। अब सिर पर इसकी मालिश करें। कुछ देर आराम करने के बाद आप पायेंगें की आपका सिरदर्द बिल्कूल दूर हो गया हैं। इसके अलावा शतावरी का ये नुस्खा आंधाशीशी रोग को भी दूर करता हैं।
अगर आप बुखार से पीडित हैं तो शतावरी के साथ गिलोय का रस गुड़ में मिक्स करें और इसका सेवन करें। इस नुस्खें से आपको जल्द आराम मिलेगा। इसके अलावा खांसी की समस्या को खत्म करने के लिए अडूसे के रस में शतावरी का रस मिक्स करें और इसमें स्वाद के हिसाब से मिश्री मिला लें और इसका सेवन करें। अगर आपको सूखी खांसी है तो इस नुस्खें से आपको जल्द राहत मिलेगी।
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