ब्रेडा (नीदरलैंड)। पेनल्टी शूटआउट में चूक एक बार फिर से भारतीय हॉकी टीम को भारी पड़ गई है। इस कारण उसका चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका।
खिताबी मुकाबले में एक बार फिर से दो साल पहले का परिणाम देखने को मिला, जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर यह टूर्नामेंट जीता था।
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रविवार को खेले गए फाइनल में गत चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 3-1 से शिकस्त देकर 15वीं बार इस टूर्नामेंट पर कब्जा किया। वहीं भारतीय टीम एक बार फिर से खिताब जीतने में नाकाम रही। यह चैम्पियंस ट्रॉफी का 37 वां और अंतिम सत्र था।
कंगारू टीम ने इससे पहले 1983, 1984, 1985, 1989, 1990, 1993, 1999, 2005, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012 और 2016 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। भारतीय टीम खिताब जीतने के करीब पहुंच गई थी। निर्धारित समय तक दोनों ही टीमों का स्कोर 1-1 था। इसके बाद खिताब का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ।
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पेनल्टी शूटआउट में ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर टायलर लोवेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन बचाव किए। इस दौरान भारत के पूर्व कप्तान सरदार सिंह, हरमनप्रीत सिंह और ललित उपाध्याय गोल करने में नाकाम रहे। भारत की ओर केवल मनप्रीत सिंह ही गोल कर सके।
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कंगारू टीम को आरन जेलेवस्की और डेनियल बेल ने पेनल्टी में गोल कर 2-0 की बढ़त दिलाई। बाद में भारतीय कप्तान और गोलकीपर श्रीजेश ने मैथ्यू स्वान और टाम क्रैग के प्रयास को नाकाम किया।
जबकि ग्रैम एडवार्डस ने गोल कर कंगारू टीम को 3-1 से जीत दिलाई। मेजबान नीदरलैंड ने ओलंपिक चैम्पियन अर्जेंटीना को 2-0 से शिकस्त देकर कांस्य पदक पर कब्जा किया। वहीं पाकिस्तान को शिकस्त देकर बेल्जियम पांचवे स्थान पर रहा।