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…तो इस वजह से महेन्द्र सिंह धोनी जीत के बाद युवा खिलाड़ियों को दे देते हैं ट्रॉफी, आपका दिल छू लेगी वजह

भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से अपना नाम लिखवा चुके महेन्द्र सिंह धोनी ने शनिवार को अपने जीवन के 37 साल पूरे कर लिए हैं। 7 जुलाई 1981 को रांची में जन्मे महेन्द्र सिंह धोनी को भारतीय क्रिकेट इतिहास का कोहिनूर माना जाता है। एमएस धोनी ने अपने इंटरनेशनल करियर के अब तक के 14 सालों के सफर में ना जाने कितनी ही उपलब्धियां दिलायी हैं।

धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने जीते हैं कई खिताब

कैप्टन कुल के नाम से मशहूर महेन्द्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट में बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई मैचों में जीत की पटकथा लिखी हैं। धोनी ने अपनी कप्तानी से भी भारत ही नहीं विश्व क्रिकेट के सबसे महान कप्तानों की श्रेणी में आ गए।

धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने विश्व टी-20 के 2007 के खिताब को जीतकर शुरूआत की, जिसके बाद तो भारतीय टीम को 2011 में 28 साल बाद विश्व चैंपियन बनाया, तो वहीं 2013 में भी चैंपियन ट्रॉफी की जंग जीतवायी। साथ ही धोनी ने भारत को पहली बार टेस्ट में नंबर वन का तमगा दिलाया।

जानिए धोनी के सरल व्यक्तित्व के सबूत

धोनी के इसी योगदान के लिए तो वो भारतीय क्रिकेट में हमेशा ही याद किए जाएंगे। महेन्द्र सिंह धोनी ने भारतीय टीम को ना जाने कितने ही दूसरे खिताब भी कप्तानी में दिलवाए लेकिन उनका स्वभाव बहुत की शांत रहा है।

मैदान में बेहद ही शांत नजर आने वाले महेन्द्र सिंह धोनी मैदान के बाद भी पूरी तरह से कूल रहते हैं। आज हम आपको उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके बहुत सरल व्यक्तित्व के बारे में बताने जा रहे हैं। जो हम नहीं बल्कि खुद धोनी ने कहा है।

पीछे रहने के कारण नहीं आ पाती मेरी तस्वीर

अक्सर ही हमनें देखा है कि महेन्द्र सिंह धोनी भारतीय टीम की खुशी में ज्यादा नजर नहीं आते लेकिन इस बात को पूछने पर उन्होंने जवाब दिया और कहा कि मैं टीम के साथ ही रहता हूं, लेकिन मेरे पीछे की तरफ खड़े रहने की वजह से टीम की टीम के बाद मेरी तस्वीर नहीं आ पाती है।

खिलाड़ियों के शतक के पास होने पर मैं रहता हूं ड्रेसिंग रूम में पीछे

वहीं धोनी को जब ये पूछा गया कि वो खिलाड़ी शतक या अर्धशतक पर ज्यादा नजर नहीं आते हैं, तो धोनी ने इसको लेकर बताया कि ऐसा नहीं है कि मैं उनकी खुशी में शामिल नहीं होता वो तो बस मेरी एन्ट्री थोड़ी देरी से होती है। मैं जब हमारे खिलाड़ी के 50 या 100 होने वाला है इस वजह से पहले जाकर ड्रेसिंग रूम में खड़ा नहीं होता।  मैं हमेशा ही शतक बनने के बाद बाहर आकर तालिया बजाता हूं। वो तो ड्रेसिंग रूम में आगे कई खिलाड़ियों के होने के कारण मैं नजर नहीं आ पाता।

तो इस वजह से महेन्द्र सिंह धोनी दे देते हैं युवा खिलाड़ियों को ट्रॉफी

धोनी से जब ये पूछा गया कि आप जीत के बाद हमेशा ट्रॉफी दूसरे खिलाड़ियों को क्यों दे देते हैं तो इसको लेकर धोनी ने कहा कि “ट्रॉफी मैं पकडूं या कोई और इससे क्या फर्क पड़ता है। मैं हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ट्रॉफी देना ज्यादा सही समझता हूं।इससे खिलाड़ियों के अंदर भविष्य में और भी ज्यादा अच्छा करने की जिज्ञासा जागेगी। इसके अलावा युवा खिलाड़ियों का भी इससे काफी मनोबल बढ़ता है।”

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