इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम वनडे मैच में भारतीय टीम की करारी हार हुई। भारत की इस हार का सबसे बड़ा कारण मध्यक्रम का फेल होना था। राहुल की जगह टीम में शामिल किए गए दिनेश कार्तिक ने शुरुआत तो अच्छी की लेकिन लंबी पारी नहीं खेल पाए। वहीं सुरेश रैना का वनडे करियर अब खत्म ही समझना चाहिए। लगभग ढ़ाई साल बाद टीम में शामिल किये गए रैना दोनों ही मैचों में अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
रोहित, धवन और कोहली पर निर्भर है टीम इंडिया

टीम इंडिया की पूरी बल्लेबाजी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा और शिखर धवन के अलावा कप्तान विराट कोहली के इर्दगिर्द घूमती है। जब भी टीम अच्छा प्रदर्शन करती है इन तीनों का उसमें महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इनमें किसी दो का भी फेल होना टीम के लिए मुसीबत बन जाता है।
आंकड़े भी यही कहते हैं
अगर आंकड़ों के हिसाब से बात करें तो ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में हुए 2015 विश्वकप के बाद से वनडे मैचों में भारत की तरह से 36 शतक लगे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि इन 36 में से 29 शतक रोहित, धवन और विराट के बल्ले से निकले हैं। विराट ने 13, रोहित ने 11 जबकि धवन ने 5 शतकीय पारियां खेली है।
अन्य सभी के नाम सिर्फ 7 शतक
इसके अलावा अन्य सभी बल्लेबाजों के बल्ले से सिर्फ 7 शतक निकले हैं। केदार जाधव ने 2 जबकि धोनी, केएल राहुल, युवराज सिंह, अजिंक्य रहाणे और मनीष पांडेय ने एक-एक शतकीय पारियां खेली है। इसमें भी राहुल और रहाणे ने ये शतक सलामी बल्लेबाजी करते हुए लगाए है। इससे समझा जा सकता है कि भारतीय मध्यक्रम कितना कमजोर हो चुका है।
2019 में है क्रिकेट विश्वकप

30 मई 2019 12वां क्रिकेट विश्वकप खेला जायेगा। भारतीय टीम यहां तीसरी बार विजेता बनने के इरादे से उतरेगी, लेकिन टीम का मध्यक्रम जैसा खेल रहा है उसे दिखकर विजेता बनने की उम्मीदों को गहरा झटका लग सकता है। इसीलिए अगर भारतीय टीम को विश्वकप जीतना है तो जल्द ही मध्यक्रम की परेशानी को दूर करना होगा।
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