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20 साल के नीरज चोपड़ा ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, India को दिलाया गोल्ड

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: 18वें एशियन गेम्स में लगतार भारत ने अपना परचम लहराया है. पहले शूटिंग और अब जेवलिन थ्रो में भारत के नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर इंडिया को गोल्ड मेडल दिलवाया है. नीरज एशियन गेम्स में यह मेडाल जीतने वाले पहले भारतीय हैं जिन्होने जेवलिन थ्रो जैसे गेम में भारत को गोल्ड दिलवाया है. हालांकि नीरज को जेवलिन थ्रो में कोई रुचि नहीं थी. उनका शौक तो कबड्डी खेलने का था.

दोस्त ने जेवलिन खेलने की सलाह दी:

नीरज चोपड़ा बचपन से ही कबड्डी के चैम्पियन रहे हैं. इसी बीच दोस्त ने नीरज को जेवलिन में आने की सलाह दी. इसके बाद नीरज के कदम उस ओर बढ़ते गए और आज उन्होंने एशियन गेम्स में गोल्ड हासिल कर लिया.

हरियाणा के पानीपत में रहते हैं नीरज :

हरियाणा के पानीपत जिले में खंडरा गांव के रहने वाले नीरज के पिता सतीश चोपड़ा किसान हैं. उनका परिवार पूरी तरह से खेती पर निर्भर है. जेवलिन थ्रोअर नीरज पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. सतीश चोपड़ा के इस बड़े बेटे को बचपन से कबड्डी खेलने का बड़ा शौक था. टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए उन्होंने एक खिलाड़ी की तरह प्रैक्टिस करना भी शुरू कर दी थी.

13 साल की उम्र में नीरज ने शुरू कर दी थी कबड्डी की प्रैक्टिस :

13 साल की उम्र में नीरज अपने गांव से कुछ ही दूर पानीपत के शिवाजी नगर स्टेडियम में कबड्डी की प्रैक्टिस करने जाने लगे. वहां उनका एक दोस्त जयवीर जेवलिन की प्रैक्टिस करने जाता था. इसी बीच एक दिन जयवीर ने नीरज को सलाह दी कि तुझे कबड्डी छोड़कर जेवलिन की प्रैक्टिस करनी चाहिए क्योंकि तेरी हाइट और फिटनेस अच्छी है. बस, यही सलाह नीरज चोपड़ा की लाइफ का टर्निंग पॉइंट बन गई.

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