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एशियन गेम्स 2018: भारत के लिए लकी रहा है जकार्ता

नई दिल्ली
चाहे कोई भी खेल हो, मेजबानी करने वाले देश को मेजबान होने का मनोवैज्ञानिक फायदा जरूर मिलता है। एशियन गेम्स का आयोजन सबसे पहली बार वर्ष 1951 में नई दिल्ली में किया गया था। भारत को तब मेजबान होने का फायदा मिला और भारत ने मेडल टैली में ओवरऑल दूसरा स्थान हासिल किया। यह गेम्स के इतिहास में भारत का अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन है।

हालांकि वर्ष 1982 में भारत को दूसरी बार मेजबानी मिली लेकिन इस बार ओवरऑल पांचवां स्थान ही मिल सका। जहां तक बाहर के देशों में भारत के प्रदर्शन की बात है तो उसका सबसे शानदार प्रदर्शन जकार्ता में ही रहा है। 1962 में आयोजित गेम्स में भारत ने तीसरा स्थान हासिल किया था। उसके बाद कभी टॉप थ्री में जगह नहीं मिल सकी। इस बार फिर जकार्ता में गेम्स को आयोजन हो रहा है, लिहाजा उम्मीद है कि भारत एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करने में कामयाब रहेगा।

वहीं‘गोल्ड लक इंडिया’ संदेश के साथ भारतीय पहलवान एशियन गेम्स में हिस्सा लेने के लिए रविवार को यहां से रवाना हुए। विदाई समारोह के दौरान खिलाड़ियों ने अपना श्रेष्ठ देने और बीते एशियन गेम्स से अधिक मेडल के साथ स्वदेश लौटने का वादा किया। विदाई समारोह में संदीप तोमर, बजरंग पूनिया, पवन कुमार, हरदीप सिंह, साक्षी मलिक, पूजा ढांढा और विनेश फोगाट ने शिरकत की। इस दौरान विनेश ने कहा कि ज्यादा मेडल जीतने के लिए देश में सुविधाओं में भी बढ़ोत्तरी करनी होगी।