इंडियन प्रीमीयर लीग (आईपीएल) में दुनियाभर के क्रिकेटर तो खेलने आते है, लेकिन बीसीसीआई भारतीय टीम के खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीग खेलने नहीं भेजता है.
आज हम इस लेख में जानने की कोशिश करेंगे, कि आखिर क्यों बीसीसीआई भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीग खेलने नहीं भेजता है.
बीसीसीआई के घरेलू कैलेंडर से टकराव खाती है अधिकतर टी-20 विदेशी लीग

आपकों बता दें, कि बीसीसीआई द्वारा भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीग में ना भेजने का एक सबसे बड़ा कारण भारत का घरेलू कैलेंडर भी है.
दरअसल, जब ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर के मौके पर बिग बैश लीग खेला जाता है, तो भारत में रणजी क्रिकेट चल रहा होता है. वही जब जनवरी-फरवरी में बांग्लादेश प्रीमियर लीग और पाकिस्तान सुपर लीग खेला जाता है, तो भारत में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे जैसे टूर्नामेंट खेले जाते है.
जब इंग्लैंड में अगस्त-सितंबर में नेटवेस्ट टी-20 ब्लास्ट और वेस्टइंडीज में केरेबियन प्रीमियर लीग खेली जाती है, तो भारत में दिलीप ट्रॉफी खेली जाती है, इसलिए भारत के के खिलाड़ियों की विदेशी टी-20 लीग में भाग ना लेने की एक मुख्य वजह बीसीसीआई का घरेलू कैलेंडर भी है. बीसीसीआई की कोशिश रहती है, कि भारत के लगभग सभी स्टार खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में भी खेले.
रहता है बीसीसीआई का व्यस्त कार्यक्रम

भारत एक ऐसी टीम है जो विश्व में सबसे ज्यादा क्रिकेट खेलती है. भारतीय टीम का पूरे साल का कार्यक्रम पूरी तरह से व्यस्त ही रहता है. ऐसे में बीसीसीआई अपने स्टार खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीग में खेलने नहीं भेज पाती है.
खिलाड़ियों की इंजरी को रखती है ध्यान में

बीसीसीआई भारतीय खिलाड़ियों को इंजरी का ध्यान भी पूरी तरह रखती है. बीसीसीआई नहीं चाहती है, कि उसके साल भर के व्यस्त कार्यक्रम में खिलाड़ियों को इंजरी हो, खिलाड़ियों के चोटिल होने के सर से भी बीसीसीआई भारत के खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीग खेलने नहीं भेजती.
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