एशिया कप 2018 को होने में अब एक महीने से भी कम समय रह गया है. इस बार यह टूर्नामेंट संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) में होने जा रहा है. हालांकि हम आपको पांच ऐसे मैचों के बारे में बताने जा रहे हैं, जब भारतीय टीम को एक बड़ी हार मिली.
5. श्रीलंका के खिलाफ 1997 में फाइनल

इस दौरान भारतीय टीम की कमान सचिन तेंदुलकर के हाथों में थी. जबकि अर्जुन राणातुंगा की कप्तानी में श्रीलंका शानदार कर रही थी. 1997 का फाइनल मुकाबला भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया. भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया.
नवजोत सिंह सिद्धू और राहुल द्रविड़ जल्द ही आउट होकर पवेलियन लौट गए. इसके बाद गांगुली और सचिन तेंदुलकर ने टीम के स्कोर को एक बड़े स्कोर की ओर ले जाने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नही हो सके.
भारत 239 रन ही बना सका. जिसके जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम ने सनथ जयसूर्या और अर्जुन राणातुंगा की शानदार बल्लेबाजी के दमपर 36.5 ओवर में जीत हासिल करली थी.
4. पाकिस्तान के खिलाफ 2004 में

2004 में पाकिस्तान की कमान इंजमाम उल हक़ संभाल रहे थे. जबकि भारतीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली थे. पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान टीम ने शोएब मलिक की 143 रनों की शतकीय पारी के दमपर भारत के सामने 300 रनों का एक स्कोर खड़ा किया. जिसके जवाब में सचिन के अलावा कोई भी भारतीय बल्लेबाज पाकिस्तान की तेज गेंदबाजी के सामने टिकता हुआ नही दिखाई दिया. जिस कारण भारत को 57 रनों से हार का सामना करना पड़ा था.
3. श्रीलंका के खिलाफ 2000 में

टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका टीम ने भारत के सामने 276 रनों का स्कोर खड़ा किया था. जिसमें सनथजयसूर्या ने 105 रनों की शतकीय पारी खेली थी. लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ा गयी.
सचिन तेंदुलकर ने अकेले ही टीम को लक्ष्य तक पहुंचाने का प्रयास किया और उन्होंने 93 रन बनाए. जबकि कोई भी अन्य बल्लेबाज 25 रनों से अधिक का स्कोर नही बना सका था. नतीजा भारत को 71 रनों से हार मिली.
2. पाकिस्तान के खिलाफ 1995 में

इस एशिया कप के दौरान भारत को पाकिस्तान के हाथों एक शर्मनाक हार मिली थी. भारत मोहम्मद अज़रुद्दीन की कप्तानी में खेल रहा था. जबकि पाकिस्तान टीम की कमान मोईन खान के हाथों में थी.
पाकिस्तान ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया और 266 रनों का एक मजबूत टोटल भारत के सामने रखा. जिसके जवाब में बल्लेबाजी के लिए उतरी भारतीय टीम की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू और संजय मांजरेकर की अर्द्धशतकीय पारी के अलावा कोई भी बल्लेबाज रन नही बना सका. भारत को 97 रनों से एक बड़ी हार मिली.
1.श्रीलंका के खिलाफ 2008 में

एक बार फिर भारत और श्रीलंका फाइनल मुकाबले में आमने सामने थे. पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने 276 रन बनाकर भारत के सामने जीत के लिए 277 रनों का लक्ष्य रखा. वीरेंद्र सहवाग ने 36 गेंदों पर 60 रनों की धमाकेदार पारी खेली.
मगर सहवाग के अलवा कोई भी बल्लेबाज अजंता मेंडिस की गेंदबाजी के सामने नही रुक पाया और भारत को 100 रनों की एक बड़ी हार के साथ एशिया ट्रॉफी गंवानी पड़ी.
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