स्पोर्टस डेस्क। वर्तमान में इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों से आरक्षण की मांग उठाई जा रही हैं। इस समय जहां गुजरात में पाटीदार आरक्षण की मांग तेजी होती दिखाई दे रही हैं वहीं मराठा आरक्षण को लेकर भी मीडिया में लगातार खबरें आ रही हैं। जहां देश में आरक्षण की मांग को लेकर युवा एक परिपक्व नजरियें से अभी तक काफी दूर हैं वहीं इस मुददे से कोसो दूर क्रिकेट के ग्राउंड से भी इससे जूडी मांग की खबरें आने लगी हैं। दरअसल हालहीं में क्रिकेट के मैदान पर आरक्षण से जूडी बात के सामने आने पर पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने एक बयान दिया हैं जो काफी चर्चाओं में बना हुआ हैं।
खबरों के अनुसार पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ की भावनांए इस मुददे से काफी आहत हुई हैं और उन्होंने इसे लेकर नाराजगी भी जाहिर की हैं। दरअसल मोहम्मद कैफ की इस नाराजगी का कारण लौकतंत्र का चौथा स्तंभी यानि की मीडिया हैं जिस पर पूर्व क्रिकेटर ने काफी भड़ास भी निकाली हैं। ये भड़ास मोहम्मद कैफ ने एक निजी वेबसाइट के आरक्षण संबंधि आर्टिकल पर निकाली हैं। खबरों के मुताबिक एक निजी वेबसाइट पर आरक्षण संबंधि आर्टिकल दिया गया था जो मोहम्मद कैफ ने पढा था। ये आर्टिकल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिपेक्ष्य में दिया गया था।
खबरों के मुताबिक इस आर्टिकल में क्रिकेट की दूनियां और खेल में सेलेक्शन से जूडी प्रक्रिया पर प्रश्न किये गये थें। इस आर्टिकल में दिया गया था कि भारतीय क्रिकेट के 86 साल में अभी तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मात्र 4 खिलाडियों को ही जगह दी गई हैं। इस आर्टिकल में लेखक इस नजरीयें को पढकर मोहम्मद कैफ काफी आहत हुए और उन्होनें अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट के जरीये इस वेबसाइट को जमकर कोसा और गुस्सा जाहिर किया। पूर्व क्रिकेटर कैफ ने इस बारे में कहा कि मीडिया में कितने वरिष्ठ संपादक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हैं। कैफ ने कहा कि सिर्फ खेलों में इस तरह की सोच से ऊपर उठकर काम किया गया हैं और ऐसी बाधाओं को सफलता के साथ तोडा गया हैं। कैफ ने कहा कि खेल की दूनियां में अब पत्रकार नफरत फैलाने का काम कर रहें हैं।
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