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एशियाई टीमों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है बर्मिंघम का मैदान, ये रहे सबूत

सैम कुरेन

इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच भारत बर्मिंघम में हार गया. यह मैच जिस मैदान पर खेला गया वहां भारतीय टीम को एक भी जीत नसीब नहीं हुई थी. सिर्फ इतना ही नहीं इस मैदान पर कोई भी एशियाई टीम नहीं जीत पाई है.

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान के बारे में. जहां पहला मुकाबला खेलते हुए भारत को 31 रनों से हार का सामना करना पड़ा. बता दें, इस मैदान पर भारत सात टेस्ट मैचों में एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर पाया है.

इस मैदान पर टेस्ट मैच खेलने का सिलसिला 1967 में शुरू हुआ था जब भारतीय टीम मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ उतरी थी. जुलाई 1967 में हुए इस टेस्ट मैच को इंग्लैंड ने 132 रनों से जीता था.

भारतीय टीम यहां अभी तक कुल 7 टेस्ट मैच खेल चुकी है, जिनमें से 6 में उसे हार मिली जबकि उसका 1 मैच ड्रॉ रहा. भारत को यहां तीन मैचों में तो पारी की हार का सामना करना पड़ा.

 

एजबेस्टन मैदान पर एशियाई देश कुल 17 टेस्ट मैच खेल चुकी है, लेकिन एक बार भी उन्हें जीत नसीब नहीं हुई है. पाकिस्तान तो यहां 8 मैच खेल चुका है, लेकिन 5 मैचों में हार झेलनी पड़ी जबकि उसके 3 मैच ड्रॉ रहे. इसी तरह श्रीलंकाई टीम ने भी यहां 2 मैच खेले और उसे दोनों मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा.

गौरतलब है कि इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में 194 रन के टारगेट का पीछा करते हुए पूरी भारतीय टीम चौथे दिन ही 162 रन पर आउट हो गई और मैच 31 रन से गवां बैठी. एजबेस्टन में टेस्ट में भारत की यह छठी हार है.

अब इन आंकड़ों को देख अंदाजा लगाया जा  सकता है कि यह मैदान एशियाई टीमों के लिए कैसा रहा है. हालांकि इस मिथक को तोड़ने का मौका इस बार भारतीय टीम के पास था. टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने अकेले 149 रन बना इसे तोड़ने की भरसक कोशिश भी की लेकिन किसी अन्य बल्लेबाज ने उनका साथ  नहीं दिया. अन्यथा भारत को जीत का स्वाद मिल गया होता.

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