बर्मिंगम
भारत के इंग्लिश समर का असली आगाज बुधवार से बर्मिंगम के एजबेस्टन क्रिकेट ग्राउंड में होगा, जब विराट कोहली की अगुआई वाली भारतीय टीम पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेलने उतरेगी। अब तक सीमित ओवरों के दो फॉर्मेट में पलड़ा बराबरी का रहा है। जहां तीन टी20 इंटरनैशनल मैचों की सीरीज को भारत ने 2-1 से अपने कब्जे में किया, वहीं तीन वनडे इंटरनैशनल की सीरीज में इंग्लैंड ने वापसी करते हुए 2-1 से जीतकर हिसाब बराबर कर दिया। लेकिन बल्ले और गेंद की असली जंग लंबे फॉर्मेट में ही देखने को मिलेगी, जहां घरेलू हालात में मेजबानों का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है। परंपरागत रूप से इंग्लिश कंडिशन को स्विंग बोलिंग के लिए अनुकूल माना जाता है और इंग्लैंड की मौजूदा टीम में भी अच्छे सीम बोलर्स मौजूद हैं।
आंकड़े तो हैं इंग्लैंड के पक्ष में
भारतीय टीम पिछले पांच साल में एशियाई धरती के बाहर अपनी छह टेस्ट सीरीज में से महज एक ही जीत पाई है और भी वेस्टइंडीज की अपेक्षाकृत कमतर टीम के खिलाफ। इंग्लैंड में भारत का ओवरऑल रेकॉर्ड भी खास उत्साहजनक नहीं रहा है। उसने यहां 57 टेस्ट मैचों में से सिर्फ छह में जीत दर्ज की है। इसमें महज तीन टेस्ट सीरीज में ही उसके हाथ जीत लगी है जो 1971, 1986 और फिर 2007 में मिली थी। साल-2007 में आखिरी जीत कप्तान राहुल द्रविड़ की अगुआई में मिली थी, जबकि महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया 2011 के दौरे में 4-0 से, तो 2014 में 3-1 से हार गई थी।
कैप्टन कोहली की बेकरारी
टीम इंडिया मौजूदा दौर में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज और अपने कप्तान विराट की अगुआई में विदेशी धरती पर अपना रेकॉर्ड सुधारने की हरसंभव कोशिश करेगी। लेकिन कोहली के लिए सीरीज जीतना आसान नहीं होगा। विराट के व्यक्तिगत प्रदर्शन पर भी दुनिया भर के क्रिकेट फैंस की नजरें होंगी और उनके सामने यह साबित करने की चुनौती होगी कि वह इंग्लैंड में भी रन बना सकते हैं। इसकी वजह यह है कि 2014 की सीरीज में उनका बल्ला बुरी तरह नाकाम रहा था और पांच पारियों में वह महज 134 रन ही जुटा पाए थे। हालांकि पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन का मानना है कि एक कामयाब सीरीज के लिए फिलहाल विराट के लिए हर चीज अनुकूल है और वह इस सीरीज में वह शानदार प्रदर्शन करेंगे।