भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी अंबाती रायडू के लिए इस साल का इंडियन प्रीमियर लीग का सीजन जबरदस्त गुजरा। अंबाती रायडू ने इस साल चेन्नई सुपर किंग्स के लिए शानदार बल्लेबाजी करते हुए हर किसी को प्रभावित किया। इसी कारण से उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ चुनी वनडे टीम में शामिल किया गया था।

अंबाती रायडू को यो-यो टेस्ट में फेल होने के कारण किया बाहर
लेकिन इंग्लैंड रवाना होने से पहले अंबाती रायडू को यो-यो टेस्ट के कठिन परीक्षण से गुजरना पड़ा और वहां की मुश्किल बाधा को ये पार नहीं कर सके। ऐसे में उन्हें वनडे टीम में शामिल करने के बाद भी हटा दिया गया। ऐसे में आप और हम समझ सकते हैं कि एक खिलाड़ी जो टीम में चयनित हो जाए उसे इस तरह से बाहर करने पर क्या बितती है।

गौतम गंभीर ने रायडू को बाहर करने पर निकाला अपना गुस्सा
भले ही इस मामले को दो महीनें होने को है, लेकिन वहीं भारतीय टीम ते पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने इसको लेकर अब अपनी चुप्पी तोड़ी और अंबाती रायडू को इस तरह से टीम से हटाने को नाइंसाफी बताया। आजतक के स्पोर्ट्स तक के शो में गंभीर ने अपनी इस बात को रखा।

रायडू को दिया जाना था कुछ और मौका
गौतम गंभीर ने कहा कि “प्रदर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। मान लिजिए अगर कोई निश्चित खिलाड़ी यो-यो परीक्षण में 15 के करीब स्कोर कर रहा है और आपका जो बैंचमार्क है वो 16 है तो ये तो ट्रेनर का काम है या ट्रेनर की जिम्मेदारी है। देखिए आज अगर आपने मुझे भारतीय टीम का ट्रेनर नियुक्त किया है तो वो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं एक लड़के को वहां तक ले जाऊं जहां इंडियन टीम का लेवल है।”

ट्रेनर का काम है एक खिलाड़ी को पूरी तरह से फिट रखना
“अगर मैं फिट लड़के को ही लेकर आ रहा हूं तो मेरा काम क्या हैं। अगर आपको एक लड़का मिलता है जिसने बहुत रन बनाए है उदाहरण के तौर पर अंबाती रायडू हैं 33 साल के रायडू ने आईपीएल में इतना खेला। फिर उनको आपने केवल यो-यो टेस्ट की वजह से निकाल दिया। उनका स्कोर 14.5 है तो ये तो ट्रेनर की जिम्मेदारी है कि वो इसमें सुधार करें। आप खिलाड़ी को कह सकते हैं कि आप एक महीनें में अपने स्कोर को ट्रेनर की सहायता से बढ़ाए उसके बाद अगर ऐसा नहीं होता है तो आप ये कदम उठा सकते हैं।”

यो-यो टेस्ट से नहीं बल्कि प्रदर्शन दिखता है फील्ड में
“आप सिर्फ यो-यो टेस्ट को ही आधार नहीं बना सकते। ये यो-यो टेस्ट की टीम नहीं है ये भारतीय टीम है। प्रदर्शन वहां दिखता है जो आप फील्ड में करते हैं। शायद इंग्लैंड में वनडे टीम में अंबाती रायडू होते तो क्या पता आप वहां सीरीज जीत जाते।यो-यो टेस्ट में ये होना चाहिए कि जो अनफिट है उसे फिट करें और जो फिट से उसे और ज्यादा फिट करें।”

यो-यो टेस्ट नहीं हो सकता सेलेक्शन का आधार
उस यो-यो टेस्ट से बाहर होने के बाद अंबाती रायडू ने इस टेस्ट को देने से साफ मना कर दिया। इसको लेकर गंभीर ने कहा कि “हां. ऐसा तो होगा। अगर आप भी उनकी जगह होते तो निराश हो जाते। आखिरकार बल्लेबाज तो रनों के लिए ही पहचाना जाएगा। यो-यो टेस्ट आपके सेलेक्शन का आधार नहीं हो सकता है। ट्रेनर को भारतीय टीम के साथ रहने के लिए इतने पैसे दिए जाते हैं तो उनकी ही जिम्मेदारी है कि वो ही जो खिलाड़ी फिट नहीं है या उस लेवल को नहीं हासिल कर पा रहा है तो उसमें वो मदद करें।”

यो-यो टेस्ट के कारण बाहर होने पर हो सकता है कोई भी निराश
“अगर आप उनकी जगह होते और इस बार उनका जिस तरह का आईपीएल रहा है वो ऐसा तो नहीं है कि अगली बार भी जाए। इसकी कोई गारंटी नहीं है। क्या पता उनका दोबारा मौका ही ना मिले। वो 23 साल के तो हैं नहीं कि उनके पास 10 साल हैं। उनकी 33 साल की उम्र है और शायद उनके पास दो-तीन साल ही हैं। और अगर 2-3 साल के लिए भी सिर्फ यो-यो टेस्ट से कोई बाहर होता है तो मुझे यकिन हैकि कोई भी निराश हो सकता है।”
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