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सौरव गांगुली, महेन्द्र सिंह और विराट कोहली की कप्तानी की तुलना करते हुए देखे कौन हैं बेहतर, आंकड़े कर रहे बयाँ

भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई बड़े और महान कप्तान हुए। इन कप्तानों में कुछ ने तो भारतीय टीम को जबरदस्त कामयाबी दिलायी, लेकिन कुछ ऐसे कप्तान रहे जिनकी कप्तानी में खास कमाल नहीं दिखा। इन सबके बीच अगर भारतीय क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों की बात करें तो महेन्द्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली और विराट कोहली का नाम आगे आएगा।

गांगुली-धोनी-कोहली का कप्तानी करने का तरीका

सौरव गांगुली, महेन्द्र सिंह धोनी और विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने खासी सफलता हासिल की है। इन तीनों की ही कप्तानी में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई जीत हासिल की। लेकिन आज हम आपको बताते हैं कि इन तीन कप्तानों का कप्तानी करने का तरीका…..

वैसे तो तीनों ही कप्तान दादा-धोनी-विराट सभी जीत के लिए जी-जान लगाते नजर आते थे, लेकिन इन तीनों ही दिग्गज कप्तानों के कप्तानी करने का अंदाज हर किसी से जुदा रहा है। तो आज हम आपको दिखाते हैं कैसे है इनकी कप्तानी में अलग शैली।

सौरव गांगुली

भारतीय क्रिकेट इतिहास में सौरव गांगुली के रूप में एक ऐसा कप्तान मिला, जिनकी कप्तानी में भारतीय क्रिकेट में एक अलग तरह के जोश का संचार हुआ। दादा बहुत ही जोशीले कप्तान थे, जो अपने टीम के कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे। उनकी कप्तानी में खास बात रही कि वो  युवाओं को समर्थन करने वाले कप्तान साबित हुए।

सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने वीरेन्द्र सहवाग, जहीर खान, हरभजन सिंह, युवराज सिंह और आशिष नेहरा जैसे युवाओं के हुनर को परखा।  इसके अलावा सौरव गांगुली जिस तरह से देश में कप्तानी करते उसी तरह से विदेश में भी अपने खिलाड़ियों को प्रेरित करने में पीछे नहीं रहे।

एक बार तो वो अपने खिलाड़ियों के लिए चयनकर्ताओं से तक लड़ बैठे थे। गांगुली, भारत के महान कप्तानों में से एक साबित हुए। गांगुली की कप्तानी में टीम की एकजुटता का जवाब ही नहीं था।

टेस्ट :-  मैच-49, जीत-21, हार-13, ड्रॉ- 15, जीत का प्रतिशत- 42.5

वनडे:- मैच- 146, जीते 76, हारे 65, जीत का प्रतिशत- 53.90

महेन्द्र सिंह धोनी 

भारतीय क्रिकेट इतिहास में कप्तान के रूप में महेन्द्र सिंह धोनी का नाम कुछ अलग तरह से लिया जाता है। धोनी अपनी कप्तानी में सबसे बड़ी चीज अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते थे।

धोनी की कप्तानी में बिल्कुल भी आक्रमकता नहीं झलकती थी और वो ठंडे दिगाम से ही अपनी विरोधी टीम की हर चाल को नाकाम कर देते थे। इसी कारण से धोनी को कैप्टन कूल भी कहा गया।

धोनी की कप्तानी में एक खास बात ये है कि वो अपने किसी एक खिलाड़ी पर भरोसा इतना ज्यादा करते थे कि खराब प्रदर्शन के बाद भी लगातार प्रेरित करते और मौका देते थे। इनकी कप्तानी कौशल ने दुनिया में खासा नाम कमाया। लेकिन इन्होंने कई अनुभवी खिलाड़ियों को एक साथ बाहर का रास्ता दिखाया।

टेस्ट :-  मैच-60, जीत-27, हार-18, ड्रॉ- 15, जीत का प्रतिशत- 45

वनडे:- मैच- 199, जीते 110, हारे 74, टाई- 4, जीत का प्रतिशत- 59.57 

टी-20:- मैच- 72, जीत- 41, हार-28, टाई- 1, परिणाम नहीं-2

विराट कोहली

भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली का कप्तानी का तरीका कुछ-कुछ सौरव गांगुली जैसा तो है, लेकिन महेन्द्र सिंह धोनी से पूरी तरह से जुदा है। विराट कोहली एक बहुत ही आक्रमक कप्तान हैं। जो मैच के खत्म होने तक हार नहीं मानते हैं। विराट कोहली हमेशा ही जीतने की मानसिकता लेकर ही उतरते हैं।

यहां तक कि वो हार से बहुत ही नफरत करने वाले कप्तान हैं।  लेकिन इन सबके बीच कोहली की कप्तानी में सबसे बड़ी खामी ये है कि उन्होंने किसी खिलाड़ी को पर्याप्त मौका नहीं दिया और उसी के परिणामस्वरूप आज भारतीय टीम नंबर-4 के बल्लेबाजी की समस्या से जुझ रही है।

टेस्ट :-  मैच-37, जीत-21, हार-7, ड्रॉ- 9, जीत का प्रतिशत- 56.75

वनडे:- मैच- 52, जीते 39, हारे -12, परिणाम नहीं- , जीत का प्रतिशत- 76.47 

टी-20:- मैच- 17, जीत- 11, हार-6,  परिणाम नहीं- 64.70

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