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रिक्शाचालक की बेटी ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर रच दिया ये नया इतिहास 

स्पोर्ट्स डेस्क:इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में खेले जा रहे 18वें एशियाई खेलों में अब तक भारत ने अच्छा प्रदर्शन करके दिखाया है। इस बार कई भारतीय खिलाड़ियों ने भारत को पदक दिलाकर कई नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। इस बार सबसे ज्यादा नए रिकॉर्ड भारतीय महिला खिलाड़ियों ने बनाये है। कल भारत की महिला खिलाडी स्वप्ना बर्मन ने हेप्टाथलान में पहली बार देश को गोल्ड मैडल दिलाया है। इस खिलाड़ी ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाने के साथ अपने नाम एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो इससे पहले किसी भारतीय खिलाड़ी के नाम नहीं था।

हम सब को पता है की हेप्टाथलॉन कोई साधारण खेल नहीं है लेकिन फिर भी इस खिलाड़ी बहुत मेहनत करके इस पदक का प्राप्त किया है। एशियन खेलों के 11वां दिन तक भारत ने अपने नाम 54 पदक कर लीए है। भारत ने अभी तक 11 गोल्ड,20 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज मेडल जीत लिए है। इससे पहले भारतीय महिलाओं ने अपने नाम एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो पहले नहीं था। महिला तीरंदाजी टीम ने रजत ​जीता तो पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया है। इसके बाद पिंकी बलहारा ने हिलाओं की 52 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता तो मालाप्रभा जाधव ने ब्रॉन्ज पदक अपने नाम किया है।

10वां दिन भारतीय महिलाओं के नाम रहा था। इस बार के एशियाई खेलों में भारतीय दल सबसे बड़ा दल बनकर इस में भाग ले रहा है। तीरंदाजी, ऐथलेटिक्स, बैडमिंटन, जिम्नैस्टिक, गोल्ड, हैंडबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, कर्राटे और कुराश जैसे खेलों मे भाग ले रहे हैं। लेकिन भारत को पहली बार हेप्टाथलान स्वर्ण पदक दिलाने वाली इस महिला खिलाड़ी का जीवन बहुत परेशानियां से भरा हुआ है। स्वप्ना बर्मन का परीवार बहुत गरीबी है और उनके पिताजी एक रिक्शाचालक है और दो समय का खाना भी बहुत कठिनाईयों से मिलता है। लेकिन इसके बाद भी इस खिलाड़ी ने अपने खेल को जारी रखा और देश का मान बढ़ाया है।



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