आज भारतीय टीम जिन बुलंदियों पर है उसका आधार पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने रखा था. दादा के नाम से मशहूर हुए कोलकाता के गांगुली ने टीम इंडिया को जीत की लत लगायी थी. एक ऐसा कप्तान जो सिर्फ जीत में विश्वास रखता.
विदेशी धरती पर अगर किसी ने दहाड़ना सिखाया तो वह सौरव गांगुली ही हैं. मगर जब ग्रेग चैपल भारतीय टीम के कप्तान बने तो उन्होंने गांगुली के करियर को ख़त्म करने तक की साजिश रच डाली थी.
आज है चैपल का जन्मदिन
ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के जबरदस्त ऑल राउंडर खिलाड़ी रहे ग्रेग चैपल आज 70 वर्ष के हो गए हैं. 15 साल के अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर के बाद भी चैपल काफी चर्चा में रहे. वह 2005 में भारतीय टीम के कोच के तौर पर नियुक्त किए गए थे. उस वक्त टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली थे.

उस दौरान चैपल और गांगुली के बीच खुलकर विवाद हुआ था. यही नही चैपल ने सचिन तेंदुलकर को लेकर भी काफी कुछ कहा था.
चैपल टीम में गांगुली नही रखना चाहते थे
चैपल और गांगुली दोनों ही अपने समय के एक शानदार खिलाड़ी रहे. 2005 में जब चैपल भारतीय टीम के कोच बने तो सबसे पहले उनकी लड़ाई की शुरुआत गांगुली से हुई. उस वक्त भारतीय टीम जिम्बाब्वे के दौरे पर गयी थी. जहां टेस्ट सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेला जाना था. उससे पहले गांगुली ने चैपल से पूछा कि युवराज और कैफ में से किसे खिलाया जाए.
इस पर चैपल का जवाब सुनकर गांगुली हैरान रह गए थे. चैपल ने कहा कि दोनों ही खेलेंगे और तुम बाहर रहोगे. इसके बाद गांगुली ने सीरीज छोड़ने का निर्णय ले लिया था.
इसी दौरान चैपल ने बीसीसीआई को एक लेटर लिखा कि गांगुली कप्तानी के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से फिट नही हैं. यह लेटर मीडिया में लीक हो गया था. जिसके बाद काफी हंगामा मचा.

कहा जाता है कि चैपल ने ड्रेसिंग रूम का माहौल ख़राब कर दिया था. जिसका जिक्र महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा में किया है.
उन्होंने बताया है कि चैपल टीम में अपनी तानाशाही चलाया करते थे. वह टीम पर अपनी राय थोपते थे. हालांकि चैपल का कार्यकाल लंबा नही चला और 2007 में कोच का पद छोड़ना पड़ा. इसके बाद गैरी किस्टर्न नए कोच बने. जिनके नेतृत्व में भारत ने 2011 में विश्वकप जीता.
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