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हनुमा के कोच का भावुक बयान घर में पिता का हुआ था निधन और टीम को जीताने के लिए बल्लेबाजी करने उतर पड़ा विहारी

इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के अंतिम दो टेस्ट मैचों के लिए युवा खिलाड़ी हनुमा विहारी को पहली बार भारतीय टीम में मौका मिला है.

हनुमा विहारी के चयन से हर कोई काफी आश्चर्यचकित है, क्योंकि उनके भारतीय टीम में चयन किसी ने उम्मीद नहीं की थी. हालाँकि, उनका प्रथम श्रेणी क्रिकेट रिकॉर्ड उनके चयन को बिलकुल सही साबित करता है.

11 वर्ष की उम्र में लिया था क्रिकेट अकादमी में एडिमिशन 

हनुमा विहारी ने सिकंदराबाद के सेंट जॉन्स स्पोर्ट्स कोचिंग फाउंडेशन में 11 वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. हैदराबाद के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी नागेश हैमंड ने कोच जॉन मनोज से हनुमा विहारी को प्रशिक्षित करने की सिफारिश की थी.

पिता की मृत्यु के एक दिन बाद ही खेली 82 रन की पारी 

हनुमा विहारी का भारतीय टीम में चयन होने के बाद उनके कोच जॉन मनोज ने अपने एक बयान में कहा,

“जिस दिन वह हमारे अकादमी में शामिल हुआ था, तो उसी दिन मुझे पता चल गया था, कि उसके पास लम्बी पारियां खेलने की क्षमता है और एक अच्छा टेम्परामेंट है. वह पहले दिन ही प्रैक्टिस में गेंद को काफी आसानी से खेल रहा था और उनके पास गेंद को खेलने के लिए काफी समय था.”

जॉन ने आगे कहा,

हनुमा एक ईमानदार, मेहनती और लगनशील खिलाड़ी है, विहारी हमेशा रनों के लिए भूखे रहते है और वह हमेशा बड़े शतक लगाने की ओर देखते है.  जब विहारी के पिता की मृत्यु हुई तो वह सिर्फ 12 वर्ष के थे. उन्होंने इसके एक दिन बाद ही उन्होंने लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद 82 रनों का पारी खेली थी और सेंट एंड्रयूज स्कूल को ट्रॉफी जीताई थी.”

17 साल की उम्र में किया है रणजी डेब्यू 

स्कूली क्रिकेट में वह शानदार प्रदर्शन के बाद हनुमा विहारी बहुत तेजी से आगे बढ़ गये थे. इसके बाद उन्हें हैदराबाद की अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-22 टीमों से खेलने का मौका मिला.

उन्हें मात्र 17 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी में मौका मिल गया था और उसके बाद उन्होंने मुंबई जैसो मजबूत टीम के खिलाफ 191 रन की एक शानदार पारी खेली थी.

पिछले दो सालों से, विहारी आंध्र क्रिकेट एसोसिएशन के लिए खेल रहे है. हनुमा ने भी अपने एक बयान में कहा, “मैंने खुद को भारत के लिए खेलने के लिए चुनौती दी थी और इसके लिए मैंने कठिन परिश्रम करने का निर्णय लिया था और आज मेरा यह सपना पूरा हो रहा है.”

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