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पीवी सिंधु ने रचा इतिहास, बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय

नई दिल्ली 
ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट भारतीय शटलर पीवी सिंधु ने इतिहास रचा दिया है। वह एशियन गेम्स के बैडमिंटन फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय हैं। उन्होंने इंडोनेशिया में जारी 18वें एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में जापान की अकाने यामागुची को 2-1 से हराया। भारतीय स्टार शटलर ने पहला गेम 21-17 से अपने नाम किया, जबकि दूसरे गेम में उन्हें 15-21 से हार मिली। तीसरे गेम में सिंधु ने वापसी करते हुए 21-10 से जीत दर्ज करते हुए फाइनल का टिकट कटा लिया। 

इस तरह इस टूर्नमेंट के सेमीफाइनल में साइना नेहवाल की हार से निराश भारतीय फैंस के लिए यह सबसे बड़ी खुश खबरी रही। फाइनल मुकाबला सिंधु और चीनी ताइपे की ताइ जू यिंग के बीच होगा। बता दें कि यह दोनों खिलाड़ियों के बीच 13वां मुकाबला था। इससे पहले खेले गए 12 मुकाबलों में से 8 में सिंधु जीत हासिल करने में सफल रही थीं, जबकि 4 मुकाबले यामागुची के नाम रह थे। 

साइना को ब्रॉन्ज मेडल 
इससे पहले सेमीफाइनल मुकाबले में साइना नेहवाल को चीनी ताइपे की ताइ जू यिंग से 2-0 (17-21, 14-21) से हार मिली। उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। वह इस टूर्नमेंट में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला शटलर बनीं। रेकॉर्ड की बात करें तो बैडमिंटन इंडिविजुअल इवेंट में आखिरी बार सैयद मोदी ने 1982 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। 

पहला गेम: सिंधु का जोरदार खेल
पीवी सिंधु ने पहले गेम में शुरुआत से ही वर्ल्ड नंबर दो यामागुची पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, जापानी खिलाड़ी ने 4-4 से बराबरी की, लेकिन ब्रेक लेने तक सिंधु ने 11-8 की बढ़त ले ली। ब्रेक के बाद सिंधु ने नेट पर अच्छे शॉट खेलकर पॉइंट जुटाए। इस दौरान यामागुची ने नेट पर काफी गलतियां भी कीं, जिसका फायदा भारतीय शटलर को मिला। सिंधु ने 22 मिनट में यह गेम 21-17 से जीतकर 1-0 की बढ़त ले ली। 

दूसरा गेम: कांटे की टक्कर, 21-15 से हारीं
दूसरा गेम भारतीय शटलर के लिए आसान नहीं रहा। जापानी शटलर से एक-एक पॉइंट के लिए जूझना पड़ा। उन्होंने 10-8 बढ़त ली थी, लेकिन यामागुची ने कमबैक करते हुए 17-14 से बढ़त अपने पक्ष में कर लिया। इसके बाद सिंधु सिर्फ एक पॉइंट ही ले सकीं। 22 मिनट तक चले इस गेम में यामागुची ने 21-15 से जीत दर्ज की। 

तीसरा गेम: सिंधु का आक्रामक खेल
तीसरे और निर्णायक गेम में सिंधु ने शरुआत से ही बेहद आक्रामक रुख अपनाया। देखते ही देखते उन्होंने 7-3 की बढ़त ले ली। जब तक यामागुची एक पॉइंट लेती, सिंधु की बढ़त 9-4 की हो गई। सिंधु के खेल का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 3 बार यामागुची कोर्ट पर ही गिर पड़ीं। ब्रेक तक भारतीय शटलर 11-7 से आगे थी। ब्रेक के बाद सिंधु ने अपनी बढ़त 16-8 कर ली। सिंधु ने यामागुची को चौंकाते हुए यह गेम 21-10 से अपने नाम करते हुए इतिहास रच दिया। 

क्वॉर्टर फाइनल में जिंदापोल को दी शिकस्त
पीवी सिंधु ने अपने क्वॉर्टर फाइनल में थाइलैंड की निचौन जिंदापोल को 21-11, 16-21 और 21-14 से हराकर यह मैच अपने नाम किया। मैच का पहला गेम जीतने में सिंधु को कोई परेशानी नहीं हुई और उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी जिंदापोल पर लगातार बढ़त बनाए रखी, लेकिन दूसरे गेम में विपक्षी खिलाड़ी ने जीत दर्ज करते हुए मैच में वापसी कर ली। हालांकि सिंधु ने तीसरे गेम अपने नाम करते हुए मैच जीत लिया। 

प्री-क्वॉर्टर में तुनजुंग को हराया 
इससे पहले पीवी सिंधु ने प्री-क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में सिंधु ने इंडोनेशिया की तुनजुंग ग्रेगोरिया मरिस्का को हराकर क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश किया था। राउंड ऑफ 16 का यह मुकाबला सिंधु ने आसानी से 34 मिनटों में अपने नाम किया। इससे पहले पीवी सिंधु और इंडोनेशिया की तुनजुंग ग्रेगोरिया मरिस्का के बीच तीन मुकाबले खेले गए थे, जिसमें सभी में भारतीय शटलर ने जीत दर्ज की थी।