इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन नस्लवाद को माना जा सकता है। नस्लवाद एक ऐसा मुद्दा है जो समय-समय पर हम इंसानों के बीच छाया रहता है। ये इतना शर्मनाक मुद्दा है कि इससे इंसानों के बीच दूरिया पैदा होती है। वैसे आपको सबसे पहले बता देते हैं नस्लवाद यानि एक इंसान दूसरे इंसान के साथ रंग-रूप को लेकर भेद करें।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर हेमांग बदानी ने उठायी नस्लवाद को लेकर आवाज
अब बात करते हैं आज हम आपको क्रिकेट में ये सबकुछ क्यों बता रहे हैं। तो इसके पीछे कारण है कि भारत के लिए 40 वनडे और कुछ टेस्ट खेल चुके पूर्व क्रिकेटर हेमांग बदानी जो पिछले काफी समय से नस्लवाद के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद किए हुए हैं। हेमांग बदानी ने अब इसको लेकर काफी गंभीर हो गए हैं और उन्होंने इसको लेकर पूरी तरह से सख्त हो गए हैं।

हेमांग को मारवाड़ी होने के कारण तमिल में कहा जाता है सेतु
हेमांग बदानी तमिलनाडू के चेन्नई में रहते हैं, लेकिन वो मारवाड़ के रहने वाले हैं। इसी कारण से उनके जीवन की शुरुआत से ही उन्हें वहां पर मारवाड़ी तमिल भाषा में कहा जाता है। वहां पर तमिल भाषा में मारवाड़ी को सेतु या सेडू कहा जाता है। इसको लेकर हेमांग बदानी बहुत ही निराश हैं और उन्होंने इसी बात पर अपनी आवाज नस्लवाद को लेकर आगे रखी है।

ट्वीटर पर बदानी ने किया अपना दर्द बयां
ऐसे में बदानी ने अपनी आवाज उठाते हुए ट्वीट कर लिखा कि ” मुझे मेरे पूरे जीवन में यहां पर “सेतु” कहा जाता रहा है। मुझे लगता है कि ये बहुत ही नस्लवाद है। मुझे ये याद नहीं है कि यहां पर किसी को भी जाति या धर्म के नाम से बुलाया जाता है। तो मुझे क्यों। ये मुझे बहुत ही अपमानजनक लगता है। मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत सुंदर नाम दिया है और ये ही उचित है। मैं भी तो सभी को नाम से ही पुकारता हूं।”
Have been called "Setu" all my life and I find it very racist.i dont remember calling anyone by their caste or religion. So why me. I find it extremely disrespectful. My parents have given me a beautiful name and it's only fair that I be called by that name and nothing else.
— Hemang Badani (@hemangkbadani) August 7, 2018
कई खिलाड़ी चढ़ चुके हैं नस्लवाद की भेंट
क्रिकेट में हेमांग बदानी पहले खिलाड़ी नहीं है जो नस्लवाद के शिकार हुए हैं। इससे पहले तमिलनाडू के ही खिलाड़ी अभिनव मुकुंद को सोशल मीडिया पर फैंस ने उनके रंग-रूप को लेकर नस्लवाद की टिप्पणी की थी। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका का हाशिम अमला को ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी औक कमेंटेटर ने आतंकवादी कह दिया था तो वहीं ऑस्ट्रेलिया के उस्मान ख्वाजा भी नस्लवाद के शिकार बने हैं।

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