इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के अंतिम दो टेस्ट मैचों के लिए बुधवार को भारतीय टीम का ऐलान हो गया था. भारतीय टीम के इस चयन में युवा खिलाड़ी पृथ्वी शॉ और हनुमा विहारी को तो टीम में मौका मिल गया, लेकिन भारतीय टीम के चयनकर्ताओं ने एक बार फिर शानदार फॉर्म में चल रहे मयंक अग्रवाल को टीम से नजरंदाज किया.
चयनकर्ताओं को शतक लगा दिया जवाब

बता दें, कि 25 अगस्त शनिवार को इंडिया ए और इंडिया बी की टीम के बीच मैच खेला गया. इस मैच में इंडिया ए की टीम ने पहले खेलते हुए इंडिया बी के सामने 218 रन का लक्ष्य रखा था.
इस लक्ष्य का पीछा करते हुए इंडिया बी के ओपनर बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ने 114 गेंदों पर 124 रन की एक शानदार पारी खेली. उन्होंने अपनी शानदार पारी के दौरान 3 छक्के व 14 चौके लगाये.
मेरा दिमाग अच्छा सोच रहा है

मयंक अग्रवाल ने फर्स्टपोस्ट से बात करते हुए अपने एक बयान में कहा, “मैं अपने खेल की प्रगति से बहुत खुश हूं. मैं जिस तरह से बल्लेबाजी कर रहा हूं उससे मुझे काफी खुशी महसूस हो रही है.
भले ही मेरा भारतीय टीम में चयन ना हुआ हो, लेकिन इसके बावजूद भी मैं सिर्फ अच्छा सोच रहा हूं और अच्छे दिमाग में हूं. मैं अपनी बल्लेबाजी के प्रदर्शन को ऐसे ही जारी रखना चाहता हूं और अपनी टीमों के लिए रन बनाना चाहता हूं.
किसी भी घरेलू सत्र में 2000 रनों से ज्यादा स्कोर करना मजाक बात नहीं है, इसलिए मैं अपने बल्लेबाजी करने के तरीके से बहुत खुश हूं. हाँ, मेरे आईपीएल अच्छा नहीं गया था.
लेकिन मुझे मेरे पूरे सत्र के प्रदर्शन को देखना है, न सिर्फ एक टूर्नामेंट को, मैं अपने लिए यह नहीं कह सकता, कि मुझे केवल इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत है.
मैं समझता हूं कि मैंने आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, लेकिन अगर मैं अपने प्रदर्शन को पूरे साल देखू तो, वह मुझे काफी अच्छा महसूस करा रहा है.
इंग्लैंड में ड्यूक्स गेंद के साथ खेलना अच्छा अनुभव

इंडिया ए के साथ कुछ दिन पहले इंग्लैंड दौरे पर जाने वाले मयंक ने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक शानदार टूर्नामेंट था, हमने वहां बहुत कुछ सीखा. इंग्लैंड में पहली बार खेलने का यह एक अच्छा अनुभव था. इंग्लिश कंडीशन में ड्यूक्स की गेंद के साथ खेलकर काफी अच्छा लगा. वहां हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन भी किया.
बल्लेबाज के रूप में वहां चुनौती यह थी कि आप क्रीज में कभी भी सेट नहीं होते थे. वहां हवाएं चलती थी और गेंद लगभग पूरे दिन स्विंग करती रहती थी.
इसलिए वहां यह बहुत महत्वपूर्ण है, कि अगर आप सेट हों, तो आप अपनी टीम को आगे तक लेकर जाओं. यह वहां बल्लेबाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक नए बल्लेबाज के लिए उन परिस्थतियों में शॉट्स खेलना आसान नहीं है. ड्यूक्स बॉल का सामना करना एक अच्छा अनुभव और एक बड़ी चुनौती थी.”
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